
President election: राष्ट्रपति चुनाव का वो समीकरण जिसमें एनडीए को मात दे सकता है विपक्ष
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई 2022 को खत्म हो रहा है, जिसके चलते राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को चुनाव है. सत्तापक्ष और विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति चुनाव के लिए मंथन शुरू हो गया है. विपक्षी दलों की बुधवार को दिल्ली में बैठक बुलाई गई है, जिसमें एनडीए के खिलाफ साझा उम्मीदवार उतारने के लिए चर्चा होगी. ऐसे में सवाल उठता है कि विपक्ष अगर साझा प्रत्याशी उतारता है को क्या एनडीए को चुनौती दे पाएगा?
राष्ट्रपति पद के लिए हो रहे चुनाव की सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. राष्ट्रपति चुनाव के लिए बुधवार से नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया एक तरफ शुरू हो रही है तो दूसरी तरफ सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने ही सियासी गोलबंदी के लिए मशक्कत शुरू कर दी है. एनडीए के खिलाफ विपक्ष का साझा उम्मीदवार उतारने को लेकर दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि सारा विपक्ष एकजुट होकर क्या एनडीए को राष्ट्रपति के चुनाव में मात दे सकता है?
राष्ट्रपति चुनाव में कुल कितने वोट
राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों की विधानसभा के सदस्य वोट डालते हैं. 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में से 233 सांसद ही वोट डाल सकते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग है. ऐसे में कश्मीर कोटे की चार राज्यसभा सीटें खाली हैं, जिसके चलते 229 राज्यसभा सांसद ही राष्ट्रपति चुनाव में वोट डाल सकेंगे. लोकसभा के सभी 543 सदस्य वोटिंग में हिस्सा लेंगे, जिनमें वो भी सीटें शामिल हैं जहां पर उपचुनाव हो रहे हैं. इसके अलावा सभी राज्यों के कुल 4 हजार 33 विधायक भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डालेंगे.
राष्ट्रपति चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या फिलहाल 4 हजार 809 होगी. हालांकि, इनके वोटों की वैल्यू अलग-अलग होती है. इस तरह से लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा सदस्यों के वोटों की वैल्यू मिलाकर देखते हैं तो वोटर्स के वोटों की कुल वैल्यू 10 लाख 86 हजार 431 होती है. इस तरह से राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए आधे से एक वोट ज्यादा की जरूरत होगी. यानी, राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए कम से कम 5,43,216 वोट चाहिए होंगे.
एनडीए-विपक्ष में किसका पलड़ा भारी? राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने वाले इन सियासी गठबंधनों की ताकत की बात करें तो कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन के पास फिलहाल 23 फीसदी के लगभग वोट हैं जबकि बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के पास लगभग 48 प्रतिशत वोट हैं. ऐसे में यूपीए के मुकाबले में तो बीजेपी को बड़ी बढ़त हासिल है, लेकिन अगर सभी विपक्षी दल मिलकर संयुक्त तौर पर कोई उम्मीदवार खड़ा करते हैं तो सियासी समीकरण बदल जाएंगे.
देश के सभी क्षेत्रीय दलों ने उसे अपना समर्थन देते हैं तो एनडीए के उम्मीदवार के लिए समस्या खड़ी हो सकती है, क्योंकि बीजेपी विरोधी सभी दलों के एकजुट होने की स्थिति में उनके पास एनडीए से करीब दो प्रतिशत ज्यादा यानी 51 प्रतिशत के लगभग वोट हो जाते हैं. इसलिए बीजेपी नेतृत्व इसी दो प्रतिशत वोट की खाई को पाटने के मिशन में जुट गया है तो विपक्षी दल साझा उम्मीदवार को उतारने के लिए मशक्कत शुरू कर दिए हैं.

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