
'संजौली मस्जिद के तीन फ्लोर होंगे ध्वस्त...', हिमाचल HC का आदेश
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण मामले में मस्जिद के ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, जबकि दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल को ध्वस्त करने का आदेश दिया है. शिमला नगर निगम को मस्जिद संरचना की वैधता पर स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी किया गया है.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली मस्जिद की अवैध निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने मस्जिद के ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, जबकि दूसरी-तीसरी और चौथी मंजिल को ध्वस्त करने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने शिमला नगर निगम को मस्जिद संरचना की वैधता पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी किया है. ये फैसला वक्फ बोर्ड द्वारा पहले दिए गए लिखित आश्वासन पर आधारित है. न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकलपीठ ने आदेश में स्पष्ट कहा, 'ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर स्टेटस क्वो रहेगा, लेकिन याची (वक्फ बोर्ड) अपनी ही दी गई अंडरटेकिंग के अनुसार दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल को ध्वस्त करेगा... (आदेश दिनांक 05.10.2024 के अनुसार).' अदालत ने पूरा रिकॉर्ड तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 के लिए तय की है.
क्या है विवाद दरअसल, ये विवाद साल 2010 का है. जब स्थानीय लोगों तथा हिंदू संगठनों ने शिकायत की थी कि संजौली मस्जिद बिना शिमला नगर निगम की अनुमति के बनाई गई है और वह भूमि भी वक्फ बोर्ड की नहीं है. शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने संरचना को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था. वक्फ बोर्ड ने इसे जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन जिला अदालत ने नगर निगम के फैसले को सही ठहराते हुए पूरी पांच मंजिला इमारत को अवैध करार दिया और उसे गिराने का निर्देश दिया.
HC का नगर निगम को नोटिस
इसके बाद वक्फ बोर्ड ने जिला अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड ने अदालत को बताया कि मस्जिद की सबसे ऊपरी दो मंजिलें पहले ही गिरा दी गई हैं और तीसरी मंजिल को भी जल्द हटाया जाएगा. इस पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को नोटिस जारी करते हुए संपूर्ण रिकॉर्ड तलब किया. उधर, 30 अक्टूबर को संजौली मस्जिद मामले में शिमला जिला अदालत ने फैसला सुनाया था. अदालत ने नगर निगम (एमसी) शिमला के आयुक्त कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए मस्जिद की निचली दोनों मंजिलों को भी अवैध करार देकर 31 दिसंबर तक गिराने का आदेश दिया था. मामले की अगली तारीख 9 मार्च 2026 तय की गई है. बता दें कि मस्जिद को लेकर विवाद 2024 में फिर से सुर्खियों में आ गया. शिमला के एक इलाके में कुछ लोगों के बीच झड़प हुई, जिसमें आरोप लगा कि झगड़ने वाले मस्जिद में जाकर शरण ले रहे थे. मंत्री अनर्योध सिंह ने विधानसभा में इन लोगों को रोहिंग्या और बांग्लादेशी बताया था. उन्होंने दावा किया कि मस्जिद में बाहरी लोग आते हैं, जबकि स्थानीय हिमाचली नहीं रहते. इसके बाद मस्जिद को गिराए जाने की मांग उठी और पुराना नगर निगम का मामला फिर से सामने आ गया.

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