
O’Romeo Review: रोमियो से हो जाएगा प्यार, जूलियट भी कम नहीं
ABP News
शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी स्टारर फिल्म ओ रोमियो ने आज यानी 13 फरवरी को बॉक्स ऑफिस पर दस्तक दे चुकी है. अगर आप भी इस फिल्म को देखने की कर रहे हैं प्लानिंग. तो टिकट बुक करने से पहले पढ़ें रिव्यू..
'ओ रोमियो' फ़िल्म की शुरुआत में जब कोई पूछता है कि कौन और शाहिद कहते हैं कि हीरो, वहां से फ़िल्म का मूड सेट हो जाता है की आगे हीरो से लेकर विलेन तक विशाल भारद्वाज की दुनिया के ये किरदार क्या गदर मचाएंगे. इस फ़िल्म की कहानी राइटर हुसैन ज़ैदी की किताब क्वींस ऑफ़ मुंबई की हुसेन उस्तरा और सपना दीदी की कहानी से इंस्पायर्ड है, जिसे फ़िल्म में ढाला गया है.
कहानी- साल 1995 की मुंबई से कहानी शुरू होती है. गैंगस्टर उस्तरा इंटेलिजेंस ब्यूरो के लिए काम करता है, ब्यूरो का हेड ख़ान उससे दूसरे गैंगस्टर्स को मरवाने का काम करवाता है. इस बीच उसके पास अफ़सा क़ुरैशी चार लोगों को मारने की सुपारी लेकर आती हैज़ वो सुपारी किसकी है और क्या उस्तरा उसकी सुपारी लेता है उसके लिए फ़िल्म देखनी होगी.
कैसी है फिल्म
विशाल और शाहिद जब साथ आए हैं तो कमाल करते हैं. ऐसा ही कमाल इस फ़िल्म में भी है. लव स्टोरीज तो कई देखी होंगी आपने लेकिन एक गैंगस्टर की लव स्टोरी में उसका सरहद पार कर जाना, मौत को छू कर वापस आ जाना ये सब नया है. इस फ़िल्म की ख़ास बात यह है की इसमें कोई सही नहीं है, हर कैरेक्टर ग्रे है, लेकिन फिर भी उनसे नफ़रत नहीं होती. फ़िल्म का कैमरा वर्क, प्रोडक्शन वैल्यू, बैकग्राऊंड स्कोर सब कुछ बड़े स्तर पर किया गया है, जो फ़िल्म को लार्जर देन लाइफ बनाती है. क्लाइमेक्स दमदार है, जब दोनों प्रेमी मिलकर बंदूकें चलाते हैं. वही अब तक तक पंजाबी गानों पर हीरो को एक्शन करते हुए बड़े पर्दे पर देखा गया है, लेकिन जब फ़िल्म की शुरुआत में शाहिद का कैरेक्टर उस्तरा धक धक करने लगा गाने पर अपने उस्तरे से 50-100 को ढेर करता है तो उसका असर ज़बरदस्त होता है. 90 के दशक के गानों ए मेरे हमसफ़र, दिल है कि मानता नहीं को बैकग्राउंड में बड़ी ही चतुराई से इस्तेमाल किया गया है.













