
NCERT की किताबों से हटाया जा रहा है मुगलों का इतिहास! सिलेबस बदलाव पर AMU के प्रोफेसर ने जताई चिंता
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NCERT Mughal Chapters Controvery: एनसीईआरटी की कक्षा 7वीं की इतिहास की किताब में से मुगल और दिल्ली सल्तनत के सभी संदर्भ हटा दिए गए हैं. इतिहास की किताब में से मुगल के संदर्भ को हटाने पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहासकार अली नदीम रिजवी का कहना है कि देश का जिस तरह से माहौल चल रहा है उसमें से मुगलों को गायब करने की कोशिश की जा रही है. इतिहास चाहे अच्छा हो चाहे बुरा हो इतिहास इतिहास होता है उसको बदला नही जा सकता है.
NCERT की किताबों को लेकर फिर एक बार विवाद शुरू हो गया है. हाल ही में एनसीईआरटी की कक्षा 7वीं की इतिहास की पाठ्यपुस्तक से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से संबंधित सभी संदर्भ हटा दिए गए हैं, जबकि इसके स्थान पर भारतीय राजवंशों, महाकुंभ, मेक इन इंडिया, अटल सुरंग, और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नए संदर्भ जोड़े गए हैं. नई पाठ्यपुस्तकों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठयचर्या रूपरेखा 2023 के अनुसार तैयार किया गया है. हालांकि, इस बदलाव पर विभिन्न शिक्षाविदों और इतिहासकारों की चिंताएं सामने आई हैं, जिसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के इतिहासकार प्रोफेसर अली नदीम रिजवी ने ऐतिहासिक तथ्यों को मिटाने की कोशिशों पर चिंता जताई है.
मुगलों को इतिहास से बाहर करने की कोशिश?
प्रोफेसर अली नदीम रिजवी ने इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "देश का माहौल इस तरह से बदल रहा है कि मुगलों को इतिहास से गायब करने की कोशिश की जा रही है. इतिहास चाहे अच्छा हो या बुरा, वह इतिहास होता है और उसे बदला नहीं जा सकता. हां, अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें शामिल किया जा सकता है, लेकिन इतिहास से किसी भी महत्वपूर्ण संदर्भ को हटा देना सही नहीं है."
प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि इतिहास का या किसी भी विषय का सिलेबस बार-बार संशोधित किया जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ पन्नों को गायब करना चिंताजनक है. उनका मानना है कि अगर नई जानकारी मौजूद है, तो उसे पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ हिस्सों को हटाना या नजरअंदाज करना देश के लिए हानिकारक हो सकता है.
क्या मुगलों का योगदान मिटाने की कोशिश हो रही है?
प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि यह बदलाव देखकर ऐसा लगता है कि मुगलों के योगदान को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह पता न चले कि मुगलों ने देश के इतिहास और संस्कृति में क्या योगदान दिया था. उन्होंने आशंका जताई कि यह बदलाव कहीं ना कहीं उस वातावरण का हिस्सा हो सकता है, जिसमें इतिहास को फिर से लिखा जा रहा है और कुछ हिस्सों को जानबूझकर हटा दिया जा रहा है.

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