
MP में बीजेपी का चेहरा शिवराज सिंह चौहान या कोई और? सात दिग्गज सांसदों को उतारने के क्या मायने
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की दूसरी सूची में जो बड़े नाम शामिल हैं, वे असल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रास्ते का रोड़ा हैं, लेकिन लाड़ली बहना योजना जैसे मील का पत्थर बनाने वाले शिवराज सिंह को क्या आसानी से खारिज किया जा सकता है - क्या वो ये सब आसानी से होने देंगे?
मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें हैं, और 2023 के चुनाव के लिए बीजेपी ने नारा दिया है - 'अबकी बार 150 पार'. जाहिर है ये लक्ष्य हासिल करने के लिए बीजेपी हर संभव उपाय भी करेगी. बीजेपी संसदीय बोर्ड में ये तो बहुत पहले ही तय हो गया था कि 2024 के आम चुनाव से पहले होने वाले सभी विधानसभा चुनाव बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़ेगी, इसलिए मध्य प्रदेश में चुनावी तैयारियां उसी हिसाब से चल रही हैं.
महीना भर पहले ही बीजेपी के 39 उम्मीदवारों की पहली सूची आयी थी. अब दूसरी लिस्ट भी आ चुकी है, और इसमें भी 39 प्रत्याशियों के ही नाम हैं. उम्मीदवारों की नयी सूची के जरिये बीजेपी ने मध्य प्रदेश की राजनीति में कई चीजें साधने की कोशिश की है - और लगे हाथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर लगाम कसने का प्रयास भी लगता है.
नयी सूची में 7 ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्हें राष्ट्रीय राजनीति से उठाकर बीजेपी ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया है. ऐसा भी नहीं कि बीजेपी ये कोई नया प्रयोग कर रही है, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी ये कवायद देखी जा चुकी है. ध्यान रहे, मध्य प्रदेश संघ और बीजेपी का गढ़ रहा है, इसलिए ये भी नहीं समझा जाना चाहिये कि नतीजे भी पिछले प्रयोगों जैसे हो सकते हैं.
बीजेपी के टिकट पर 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे 7 सांसदों में से 3 तो फिलहाल केंद्र की मोदी कैबिनेट का हिस्सा हैं. खास बात ये है कि जिन इलाकों से इन नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा गया है, वहां पर बीजेपी का अच्छा प्रदर्शन नहीं दर्ज किया गया है, जबकि ये नेता अपने क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं के मुकाबले ज्यादा असरदार साबित हो सकते हैं.
सूची में बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता भी हैं जो एक अर्से से पश्चिम बंगाल के प्रभारी रहे हैं, और मध्य प्रदेश की राजनीति में भी वो जनाधार वाले नेता माने जाते हैं. मुश्किल ये है कि जो जौहर वो पश्चिम बंगाल की जंग में दिखा चुके हैं, अगर मध्य प्रदेश में भी वही रवैया रहा तो लेने के देने पड़ने की भी गारंटी है.
लेकिन बात बस इतनी ही नहीं है. ऐसे कद्दावर नेताओं को मैदान में उतार कर बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान पर भी लगाम कसने की कोशिश की है. सवाल ये है कि क्या शिवराज सिंह चौहान को यूं ही निबटाया जा सकता है? और सवाल ये भी है कि क्या शिवराज सिंह चौहान बीजेपी के मौजूदा नेतृत्व को ये सब यूं ही होने देंगे?

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