
Kargil War: ठीक 23 साल पहले PAK ने की थी NH-1 पर बमबारी... ये है पूरी कहानी
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1 जून 1999 का दिन यानी आज से ठीक 23 साल पहले पाकिस्तानी सेना राष्ट्रीय राजमार्ग एक पर बमबारी कर रहे थे. तोप के गोले लगातार NH-1 पर दागे जा रहे थे. करगिल युद्ध को करीब एक महीना हो गया था. इस शेलिंग की वजह से लद्दाख बाकी देश से कट गया था.
ठीक 23 साल पहले आज ही के दिन यानी 1 जून 1999 को पाकिस्तानी सेना के शेलिंग (Shelling) यानी बमबारी शुरु कर दी थी. ताकि भारतीय सेना करगिल में चोटियों पर बैठे पाकिस्तानी घुसपैठियों को भगा न सकें. इंडियन आर्मी के हथियार, मेडिकल सप्लाई और रसद लद्दाख तक पहुंच न सके. करगिल में इस राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई करीब 217.4 किलोमीटर है.
यह सड़क श्रीनगर को लेह से जोड़ती है. दुनिया की सबसे ऊंची रणनीतिक सड़क. इसमें दो ही लेन है. खराब भौगोलिक स्थिति और पतली सड़क होने की वजह से यहां पर ट्रैफिक धीमी ही रहती है. पाकिस्तानी फौजी हाइवे के सामने की तरफ ऊंची पहाड़ियों पर बैठे थे. वहां से गोलीबारी कर रहे थे. इसके अलावा पाकिस्तानी तोपों के गोले लगातार इस सड़क को टारगेट कर रहे थे. भारत सरकार के लिए इस हाइवे को बचाना बेहद जरूरी था.
NH-1 भारतीय सेना के लिए सबसे प्रमुख मार्ग है. पाकिस्तानी फौजी इस सड़क पर मोर्टार्स, आर्टिलरी और एंटी-एयरक्राफ्ट गन से हमला कर रहे थे. पाकिस्तान ने इस सड़क पर हमला करने के लिए और इस पूरे युद्ध से पहले अमेरिका से मिले AN/TPQ-36 फायरफाइंडर रडार और ड्रोन्स से रेकी कराई थी. पाकिस्तानी का पहला निशाना NH-1 ही था. ताकि भारतीय जवानों को रोका जा सके.
भारतीय फौजियों ने पहाड़ों से सटे NH-1 के किनारे-किनारे रातों-रात ट्रक की ऊंचाई की मोटी दीवार बना दी थी, ताकि ऊपर से हो रही गोलीबारी से जवानों और वाहनों को बचाया जा सके. यह दीवार इतनी मोटी और मजबूत थी कि पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा फेकें गए हैंडग्रैनेड और बमों का भी असर नहीं हो रहा था. इस दीवार की वजह से भारतीय फौजी हथियार, मेडिकल सप्लाई और रसद आदि लेकर आगे जा पाए थे.
LOC के ज्यादातर पोस्ट इस राजमार्ग के बराबरी पर हैं. यानी सीधा निशाना लगाना बेहद आसान था. लेकिन भारतीय एयरफोर्स और सेना के जवानों ने जान की परवाह न करते हुए NH-1 के सामने के सभी पोस्ट को जून मध्य तक पाकिस्तानी घुसपैठियों से छुड़ा लिया था. 6 जून को भारतीय सेना भयानक हमला किया. 9 जून को बटालिक सेक्टर की दो महत्वपूर्ण चोटियां सेना के कब्जे में वापस आ गईं.
11 जून को परवेज मुशर्रफ और लेफ्टि. जनरल अजीज खान की बातचीत को सार्वजनिक किया गया. 13 जून को भारतीय सेनाओं ने द्रास में तोलोलिंग पर कब्जा जमा लिया. इसमें इंडियन आर्मी के कई जवान शहीद हुए लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चोटी पर सेना का वापस कब्जा हो गया.

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