
FB के जरिए हनी ट्रैप में फंसा सतेंद्र सिवाल ऐसे बना ISI एजेंट... जानिए PAK खुफिया एजेंसी की मॉडस ऑपरेंडी
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भारत के खिलाफ साजिश रचने से बाज नहीं आ रही है. रूस की इंडियन एंबेसी में तैनात एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया गया है, जो भारतीय कर्मचारी होने के बावजूद पाकिस्तानी एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलीजेंस (ISI) के लिए काम कर रहा था. यह गिरफ्तारी मेरठ से हुई है, जिसे यूपी एटीएस ने अंजाम दिया है.
उत्तर प्रदेश पुलिस ने मॉस्को में भारतीय दूतावास में काम करने वाले एक शख्स को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. यूपी के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) की मेरठ फील्ड इकाई ने सतेंद्र सिवाल को पूछताछ के लिए बुलाया था, जो कि साल 2021 से मॉस्को में भारतीय दूतावास में आईबीएसए (इंडिया बेस्ड सिक्योरिटी असिस्टेंट) के रूप में कार्यरत था. पुलिस द्वारा सख्ती से पूछताछ के दौरान उसने अपना अपराध कबूल कर लिया है.
जानकारी के मुताबिक, आरोपी जासूस सतेंद्र सिवाल हापुड़ जिले के शाहमहिउद्दीनपुर गांव का रहने वाला है. वो मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में आईबीएसए के रूप में तैनात था. उस पर आरोप है कि उसने आईएसआई के हैंडलर्स को भारतीय दूतावास, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों की महत्वपूर्ण गोपनीय सूचना दी हैं. इतना ही नहीं आईएसआई के निर्देश पर वो विदेश मंत्रालय के कर्मचारियों हनी ट्रैप में फंसवाकर या फिर पैसे का लालच देकर गोपनीय सूचनाएं लीक करवाता था.
इंटेलिजेंस इनपुट मिलने के बाद यूपी एटीएस ने इलेक्ट्रॉनिक और फिजिकल सर्विलांस के बाद पाया कि आरोपी आईएसआई हैंडलर्स के नेटवर्क के साथ भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल है. उसके खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 121ए (देश के खिलाफ युद्ध) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत केस दर्ज किया है. उसे गिरफ्तार करके लखनऊ लाया जा रहा है, जहां पर एटीएस हेडक्वार्टर में आगे की पूछताछ की जाएगी. इसमें केंद्रीय जांच एजेंसियां में आगे चलकर शामिल होंगी.
बताया जा रहा है कि आरोपी सतेंद्र सिवाल को भी आईएसआई ने हनी ट्रैप के जरिए ही अपने जाल में फंसाया था. इसके बाद वो खुफिया एजेंसी के इशारे पर अपने ही देश के खिलाफ काम करने लगा. यहां से जुड़ी गोपनीय जानकारियां खुद तो अपने हैंडलर्स को भेजता ही था, उनके इशारे पर दूसरों को भी इस जाल में फंसाता था. यूपी एटीएस के साथ केंद्रीय जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उससे पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिससे कि पाक नापाक हरकत का पर्दाफाश हो सकता है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मॉस्को में तैनाती के दौरान सतेंद्र सिवाल फेसबुक के जरिए एक महिला के संपर्क में आया था. उसने पहले मैसेंजर से उससे बातचीत करनी शुरू की, उसके बाद मोबाइल नंबर लेकर व्हाट्सऐप पर बातें करनी लगी. फेसबुक पर उसका नाम पूजा लिखा हुआ था. उसने खुद को रिसर्चर बताया था. इसलिए उसने कुछ जानकारियां मांगी थी, ताकि उसके रिसर्च में मदद मिल सके. यहीं से सतेंद्र उसकी जाल में फंस गया. उसके बाद उसे गोपनीय जानकारियों के बदले पैसे देने का लालच भी दिया गया था.
हनी ट्रैप या हनी ट्रैपिंग एक तरह की जासूसी है. इसमें पारस्परिक, राजनीतिक या मौद्रिक उद्देश्य के लिए एक रोमांटिक या यौन संबंधों का उपयोग किया जाता है. हनी ट्रैप में किसी ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया जाता है, जिसके पास कोई आवश्यक जानकारी हो या फिर उससे पैसे ठगने हो. ट्रैपर अपने टारगेट को एक झूठे रिश्ते में फंसाने की कोशिश करता है, ताकि उससे संबंधित चीजें हासिल कर सके. 'हनी ट्रैप' शब्द का प्रयोग तब भी किया जाता है जब डेटिंग साइटों का उपयोग किसी पीड़ित तक पहुंच के लिए किया जाता है.

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