
Elon Musk को बड़ा झटका, ट्विटर डील मामले में अक्टूबर से सुनवाई करेगा अमेरिकी कोर्ट
AajTak
Elon Musk vs Twitter के मामले में सोशल मीडिया कंपनी ने कोर्ट का रुख किया था. मस्क ने अदालत से फरवरी में सुनवाई शुरु करने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने उनके निवेदन को दरकिनार करते हुए अक्टूबर से ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है.
Elon Musk vs Twitter: दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क और माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर (Elon Musk vs Twitter) के बीच की लड़ाई अब कोर्ट में लड़ी जाएगी. 44 बिलियन डॉलर की डील रद्द होने के मामले अमेरिका की कोर्ट ने पांच दिवसीय सुनवाई के लिए अक्टूबर का महीना तय किया है.
इसे मस्क के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. क्योंकि मस्क कोर्ट से फरवरी में मुकदमा शुरू करने की अपील कर रहे थे. इसके उलट ट्विटर ने अदालत से सितंबर में ट्रायल चलाने का अनुरोध किया था. ट्विटर की अपील का मस्क की टीम ने विरोध किया था, लेकिन अंत में कोर्ट ने सितंबर से केस चलाने की अनुमति दे दी.
ट्विटर कंपनी डील कैंसिल करने पर पिछले हफ्ते ही मस्क के खिलाफ कोर्ट पहुंची थी. माइक्रोब्लॉगिंग साइट की कार्रवाई को मस्क ने कोर्ट के जरिये डील करवाने का दबाव बनाने का तरीका बताया है.कोर्ट के फैसले के बाद ट्विटर के शेयर में बढ़ोतरी देखी गई. दोपहर में 3.6% बढ़कर शेयर का रेट 39.81 डॉलर हो गया.
डेलावेयर के जज ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया कंपनी डील की अनिश्चितता की हालत में त्वरित समाधान की हकदार है. डेलावेयर के कोर्ट ऑफ चांसरी की चांसलर कैथलीन मैककॉर्मिक ने कहा दोनों पक्ष चाहते तो इस ट्रायल को रोक सकते थे. उन्होंने आगे कहा कि मुकदमे में देरी करने पर कंपनी को भारी नुकसान होने का खतरा है.
बता दें कि मस्क ने जैसे ही ट्विटर के साथ डील कैंसिल की थी, कंपनी के शेयर बुरी तरह टूट गए थे. 12 जुलाई को कंपनी के शेयर में 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आने से निवेशकों के 3.2 अरब डॉलर साफ हो गए थे. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ट्विटर शेयर (Twitter Stocks) अप्रैल में दिए गए 54.20 डॉलर प्रति शेयर के मस्क के ऑफर से काफी नीचे पहुंच गए थे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.










