
Coronavirus China का फैलाया हुआ एक जैविक हथियार? जानिए क्यों कहा जा रहा है ऐसा
Zee News
Corona Is Biological Weapon Of China: इस मामले में संदिग्ध के रूप में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी सामने आया, जो बीमारियों के अध्ययन में महारत वाली संस्था है और उसी शहर में स्थित है, जहां पहली बार कोविड-19 की पुष्टि हुई थी.
नई दिल्ली: कोविड-19 (Covid-19) के शुरुआती मामले सबसे पहले चीनी शहर वुहान (Wuhan) में दिसंबर 2019 से दिखाई देने लगे थे. इस दौरान दुनिया इस फैलते खतरे से अनजान रही क्योंकि चीन (China) सरकार ने सक्रिय रूप से कोरोना वायरस (Coronavirus) के बारे में जानकारी को दबाने की कोशिश की और यहां तक कि दुनिया को इस बारे में सचेत करने का प्रयास करने वालों को धमकाने और दंडित करने के हद तक चली गई. तब से ही वायरस के प्रारंभिक रूप से निपटने और इसके बारे में जानकारी छुपाने के प्रयासों के लिए चीन सरकार (Chinese Govt) को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है. चीन की कथित लापरवाही ही एकमात्र कारण है कि वायरस दुनियाभर में तेजी से फैल गया और पूरी दुनिया को झकझोर देने में कामयाब रहा.
Indian France Rafale deal: फ्रांस से खरीदे जाने वाले 114 राफेल की मंजूरी डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मिल गई है. जिससे यह डील अंतिम चरण में पहुंच गई है. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC की बैठक में डील पर चर्चा के बाद मुहर लगाई जाएगी. अंतिम हस्तारक्षर इस डील पर पीएम मोदी करेंगे.

India Nuclear Powered Submarine: साल 2040 तक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी ऑपरेटर बन सकता है. इस दौरान भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा. अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन जाएगा. दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर सबमरीन अमेरिका के पास हैं. इनकी संख्या 60 से 70 के बीच है.

DRDO hypersonic missile: भारतीय नौसेना एक बेहद लंबी दूरी वाली, हवा से लॉन्च होने वाली 'एंटी-शिप बैलिस्टिक' मिसाइल हासिल करने की योजना बना रही है. यह मिसाइल 1,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आए बिना ही उनके जहाजों को समंदर की गहराइयों में भेज सकेंगे.

30MM Naval Gun Indian Navy: यह गन सिस्टम भारत फोर्ज के आर्टिलरी सेक्टर में अनुभव पर आधारित है. कंपनी पहले ही 30×173 मिमी NATO स्टैंडर्ड कैलिबर पर आधारित मॉड्यूलर टर्रेट्स विकसित कर चुकी है. इनका इस्तेमाल इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स में होता है. यही कैलिबर समुद्री नजदीकी लड़ाई (Close-Range Engagement) के लिए भी प्रभावी माना जाता है.









