
Chardham Yatra 2021: Kedarnath Dham के कपाट खुले, PM Modi की तरफ से की गई पहली पूजा
Zee News
Kedarnath Dham Doors Opened: केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद मुख्य पुजारी ने स्वयंभू शिवलिंग को समाधि से जागृत किया. फिर निर्वाण दर्शनों के बाद श्रृंगार और रूद्राभिषेक पूजा की गई. हालांकि कोरोना महामारी को देखते हुए चारधाम यात्रा अस्थाई तौर पर स्थगित है.
हरेंद्र नेगी, देहरादून: ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट विधि-विधान पूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ आज सोमवार को मेष लग्न, पुनर्वसु नक्षत्र में सुबह पांच बजे खुल गए. कपाट खुलने की प्रक्रिया सुबह तीन बजे से शुरू हुई. केदारनाथ धाम में पहली रूद्राभिषेक पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हुई. पूजा में जनकल्याण की कामना की गई. बता दें कि रावल भीमाशंकर, मुख्य पुजारी बागेश लिंग, देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी. सिंह और जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मनुज गोयल ने पूर्व द्वार से मंदिर मुख्य प्रांगण में प्रवेश किया. फिर मुख्य द्वार पर पूजा-अर्चना की. मंत्रोच्चार के बाद ठीक पांच बजे भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए.
Indian France Rafale deal: फ्रांस से खरीदे जाने वाले 114 राफेल की मंजूरी डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मिल गई है. जिससे यह डील अंतिम चरण में पहुंच गई है. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC की बैठक में डील पर चर्चा के बाद मुहर लगाई जाएगी. अंतिम हस्तारक्षर इस डील पर पीएम मोदी करेंगे.

India Nuclear Powered Submarine: साल 2040 तक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी ऑपरेटर बन सकता है. इस दौरान भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा. अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन जाएगा. दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर सबमरीन अमेरिका के पास हैं. इनकी संख्या 60 से 70 के बीच है.

DRDO hypersonic missile: भारतीय नौसेना एक बेहद लंबी दूरी वाली, हवा से लॉन्च होने वाली 'एंटी-शिप बैलिस्टिक' मिसाइल हासिल करने की योजना बना रही है. यह मिसाइल 1,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आए बिना ही उनके जहाजों को समंदर की गहराइयों में भेज सकेंगे.

30MM Naval Gun Indian Navy: यह गन सिस्टम भारत फोर्ज के आर्टिलरी सेक्टर में अनुभव पर आधारित है. कंपनी पहले ही 30×173 मिमी NATO स्टैंडर्ड कैलिबर पर आधारित मॉड्यूलर टर्रेट्स विकसित कर चुकी है. इनका इस्तेमाल इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स में होता है. यही कैलिबर समुद्री नजदीकी लड़ाई (Close-Range Engagement) के लिए भी प्रभावी माना जाता है.









