
Ashadh Month 2025: देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा तक, आषाढ़ माह में आएंगे ये बड़े व्रत-त्योहार
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Ashadh Month 2025: आषाढ़ के महीने में सबसे ज्यादा फलदायी उपासना गुरु की होती है. इसके अलावा, इस महीने देवी की उपासना भी शुभ फल देती है. श्री हरि विष्णु की उपासना से संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है. इस महीने में जल देव की उपासना से धन की प्राप्ति सरल हो जाती है.
Ashadh Month 2025: हिन्दू पंचांग का चौथा महीना आषाढ़ का महीना है. यह संधिकाल का महीना है. इसी महीने से वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है. इसी महीने भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा भी निकाली जाती है. आषाढ़ से वातावरण में थोड़ी सी नमी आनी शुरू हो जाती है. कामना पूर्ति के लिए भी यह महीना उत्तम माना जाता है. आषाढ़ मास के पहले दिन खड़ाऊं, छाता, नमक और आंवले का दान बहुत उत्तम माना जाता है. इस बार आषाढ़ मास 12 जून से 10 जुलाई तक रहने वाला है.
आषाढ़ में किसकी पूजा करें? आषाढ़ के महीने में सबसे ज्यादा फलदायी उपासना गुरु की होती है. इसके अलावा, इस महीने देवी की उपासना भी शुभ फल देती है. श्री हरि विष्णु की उपासना से संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है. इस महीने में जल देव की उपासना से धन की प्राप्ति सरल हो जाती है. आषाढ़ में मंगल और सूर्य की उपासना अवश्य करें.
आषाढ़ में आने वाले व्रत-त्योहार
गुरुवार, 12 जून: आषाढ़ मास प्रारंभ, प्रतिपदा तिथि शनिवार, 14 जून: कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी रविवार, 15 जून: मिथुन संक्रांति बुधवार, 18 जून: मासिक जन्माष्टमी, कालाष्टमी शनिवार, 21 जून: योगिनी एकादशी, साल का सबसे बड़ा दिन रविवार, 22 जून: योगिनी एकादशी पारण, मासिक कार्तिगाई सोमवार, 23 जून: सोम प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि मंगलवार,24 जून: रोहिणी व्रत बुधवार, 25 जून: दर्श अमावस्या, आषाढ़ अमावस्या गुरुवार, 26 जून: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, कलश स्थापना, चंद्र दर्शन शुक्रवार, 27 जून: जगन्नाथ रथयात्रा शनिवार, 28 जून: विनायक चतुर्थी सोमवार, 30 जून: स्कंद षष्ठी गुरुवार, 3 जुलाई: मासिक दुर्गाष्टमी रविवार, 6 जुलाई: देवशयनी एकादशी, गौरी व्रत आरंभ सोमवार, 7 जुलाई: देवशयनी एकादशी पारण, वासुदेव द्वादशी मंगलवार, 8 जुलाई: भौम प्रदोष व्रत, जयापार्वती व्रत बुधवार, 9 जुलाई: आषाढ़ चौमासी चौदस गुरुवार, 10 जुलाई: गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत, व्यास पूजा, कोकिला व्रत, गौरी व्रत समाप्त
आषाढ़ माह में क्या न करें? आषाढ़ माह में लहसुन और प्याज का अधिक सेवन करना वर्जित है. इस महीने बारिश होने से संक्रमण बढ़ जाता है और रोग घेर लेते हैं. ऐसे में बासी भोजन खाने से परहेज करें. इस महीने आने वाली देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है. चातुर्मास में शादी-विवाह जैसे शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं.

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