
सीमित कोचिंग, बोर्ड अंकों से एडमिशन... सरकार की इन सिफारिशों पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट!
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सरकार की समिति ने कोचिंग क्लास को 2-3 घंटे तक सीमित करने, स्कूल सिलेबस को JEE–NEET जैसी परीक्षाओं से जोड़ने, बोर्ड अंकों को कॉलेज एडमिशन में ज्यादा वेटेज देने और कोचिंग संस्थानों को रेगुलेट करने जैसे सुझाव दिए हैं. सवाल ये है कि इन बदलावों से असल में क्या बदलेगा और क्या सिर्फ इतना काफी होगा? या क्या सच में कुछ जमीनी बदलाव और भी हैं जिन पर सोचना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.
स्कूल शिक्षा और कोचिंग कल्चर पर केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय समिति की अहम सिफारिशें की हैं. इनमें कोचिंग क्लास को 2-3 घंटे तक सीमित करना, स्कूल सिलेबस को JEE–NEET जैसी परीक्षाओं से जोड़ना, बोर्ड अंकों को कॉलेज एडमिशन में ज्यादा वेटेज देना और कोचिंग संस्थानों को रेगुलेट करना शामिल हैं. aajtak.in ने इन सिफारिशों पर शिक्षा से जुड़े अलग-अलग एक्सपर्ट से बातचीत करके जाना कि इस बदलाव का कैसा असर पड़ने वाला है और कहां खाईं अभी बाकी है.
एसकेवी तीमारपुर दिल्ली की रिटायर्ड प्रिंसिपल अनीता भारती कहती हैं, 'स्कूलों में तो JEE-NEET के एक्सपर्ट होते नहीं हैं. एक्सपर्ट बनने के लिए टीचर पर ही दबाव होगा. लेकिन टीचरों की न वैसी ट्रेनिंग है और न उनके पास इतना समय कि वो नए बदलाव झटपट स्वीकार लें. दूसरी ओर, अगर JEE-NEET में एडमिशन के लिए बोर्ड के नंबर जोड़ेंगे तो सरकारी स्कूलों के बच्चों का नुकसान हो सकता है. इन स्कूलों के बच्चे गरीब, वंचित समाज से होते हैं. ये बच्चे मेरिट में पीछे छूट जाएंगे.'
अनीता भारती के मुताबिक आज सरकारी स्कूलों के टीचर पढ़ाने से ज्यादा दूसरे सरकारी कामों में उलझे हैं. सरकार वाकई स्कूलों का कायाकल्प चाहती है तो पहले ये सब बंद हो और सिर्फ पढ़ाई पर फोकस हो. तकनीकी विषयों की तैयारी पर अनीता भारती का सवाल सीधा है, वो कहती हैं कि ट्रेनिंग भी टेक्निकल सब्जेक्ट की है. ये तैयारियां सरकारी स्कूलों में कैसे होंगी? प्राइवेट वाले तो एक्सपर्ट रख लेंगे लेकिन सरकारी स्कूलों में कम से कम टीचर्स ट्रेनिंग पर जोर दिया जाए.
'कोचिंग इसलिए पैदा हुई क्योंकि स्कूल सिस्टम अधमरा था'
शिक्षाविद और असेसमेंट एक्सपर्ट शशिप्रकाश सिंह इस बहस को जड़ से पकड़ते हैं. वो कहते हैं कि दो इश्यू हैं. पहला तो कोचिंग बंद कर स्कूलों में जो सिलेबस पढ़ाया जाए उसी पर एंट्रेंस टेस्ट हो. दूसरा कोचिंग पैदा ही इसलिए हुई क्योंकि स्कूल सिस्टम अधमरा हो गया था. स्कूल अगर अच्छा हो गया तो छात्र मजबूरन कोचिंग क्यों जाएगा? इसलिए सबसे पहले स्कूली शिक्षा को इंप्रूव करें.
कोचिंग पर नियंत्रण के सवाल पर वो चेतावनी देते हैं, 'कोचिंग पर रेगुलेशन होना चाहिए, लेकिन इंस्पेक्टर राज नहीं होना चाहिए.' शशिप्रकाश सिंह कहते हैं कि इसमें कोई गुनाह नहीं है कि मैं अपने बच्चे को ज्यादा गणित या साइंस सिखाना चाहता हूं. इसके बाद अगर बच्चे अच्छे एंट्रेंस से पास हो रहे हैं तो अच्छा ब्रेन सामने आ रहा है. चीन, कोरिया, इंडिया जैसे देश एंट्रेंस से ही चयन करते हैं.

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