
AQI क्या है और इसे कैसे मापा जाता है? जानें वायु प्रदूषण से जुड़े सारे सवालों के जवाब
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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण गंभीर स्थिति में पहुंच गया है. सड़कों पर घने धुएं की चादर छाने के साथ ही AQI एक महत्वपूर्ण पैमाना बन गया है. इसलिए इंडिया टुडे ने AQI के पीछे छिपे विज्ञान को आम भाषा में समझाया है.
सड़कों पर घने धुएं की चादर छाने के साथ ही AQI एक महत्वपूर्ण पैमाना बन गया है. सर्दी की ठंड और कोहरा दिल्ली-एनसीआर के लाखों निवासियों के लिए एक अप्रत्याशित मेहमान लेकर आए हैं, जो है खराब हवा. इंडिया टुडे ने इस शब्द के पीछे छिपे विज्ञान को आम भाषा में समझाया है.
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) नामक एक माप यह बताता है कि किसी विशेष स्थान पर हवा कितनी खराब हो गई है. इसकी रीडिंग आमतौर पर श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए चेतावनी के रूप में काम करती है. राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है और इंदिरापुरम में AQI 999 तक पहुंच गई है. दिल्ली के अन्य भागों में 24 घंटे का औसत पहली बार “गंभीर+” श्रेणी में 453 पर रहा. वहीं 36 निगरानी स्टेशनों में से 35 स्टेशन 400+ AQI श्रेणी में रहे तो, "वायु गुणवत्ता सूचकांक वास्तव में क्या है? हम इसकी व्याख्या कैसे करें? इसकी गणना के लिए डेटा कहां से आता है?" ऐसे प्रश्न देश भर में कई लोगों के मन में हैं.
सरल शब्दों में कहें तो AQI वायु में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10 कण) का 0 से 500 तक का सूचकांक है. यह संख्या जितनी अधिक होगी, हवा उतनी ही खराब होगी.
AQI की गणना कैसे की जाती है?
गणना में हवा में प्रदूषक सांद्रता के स्तर को सूत्र द्वारा सूचकांक मानों में परिवर्तित करना शामिल है. सूत्र प्रत्येक प्रदूषक के लिए एक सूचकांक मान देता है, जिससे वायु गुणवत्ता पर प्रत्येक प्रदूषक के प्रभाव को स्वतंत्र रूप से समझा जा सकता है. इनमें से सबसे अधिक मान AQI बन जाता है, जिसका अर्थ है कि सबसे अधिक मान वाला प्रदूषक अंतिम AQI निर्धारित करता है. राष्ट्रीय राजधानी के ज़्यादातर इलाकों में PM2.5 और PM10 कण मुख्य प्रदूषक कण हैं. इनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे ज़्यादा होता है, जो कि मानव बाल की चौड़ाई से लगभग 30 गुना छोटा होता है.
इसकी निगरानी कैसे की जाती है?

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