
74 साल बाद संयुक्त राष्ट्र में लाए गए म्यांमार संबंधी प्रस्ताव पर वोटिंग से भारत, चीन, रूस दूर रहे
The Wire
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव में म्यांमार में तत्काल हिंसा खत्म करने और देश की प्रमुख नेता आंग सान सू ची समेत अन्य राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करने का अनुरोध किया गया है. भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि भारत का मानना है कि म्यांमार की जटिल स्थिति के संबंध में शांत और धैर्यपूर्ण कूटनीति का दृष्टिकोण अपनाने की ज़रूरत है.
संयुक्त राष्ट्र: भारत, चीन और रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में एक मसौदा प्रस्ताव पर हुए मतदान से दूर रहे, जिसमें म्यांमार में तत्काल हिंसा खत्म करने और देश की प्रमुख नेता आंग सान सू ची समेत अन्य राजनीतिक कैदियों को रिहा करने का अनुरोध किया गया है.
भारत की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में हुए मतदान के दौरान 12 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जबकि भारत, चीन और रूस वोटिंग से दूर रहे.
यह बीते 74 साल में सुरक्षा परिषद में म्यांमार के संबंध में पारित पहला प्रस्ताव है. इससे पहले, वर्ष 1948 में बर्मा के नाम से जाने जाने वाले म्यांमार से जुड़ा एक प्रस्ताव पारित किया गया था. ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिलने के बाद लाए गए इस प्रस्ताव में बर्मा को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता प्रदान करने के संबंध में अनुशंसा की गई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 16 वर्षों से एजेंडे में होने के बावजूद जब भी म्यांमार के भीतर महत्वपूर्ण गिरावट आई है, परिषद ने केवल औपचारिक बयान जारी किए हैं, जैसे कि 2017 में रोहिंग्या शरणार्थियों का बांग्लादेश में पलायन.

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