
2014, 2019 के बाद अब 2024... चुनाव अभियान के आगाज के लिए पीएम मोदी ने मेरठ को ही क्यों चुना
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मेरठ की रैली में बीजेपी के सहयोगी दल भी शामिल हुए. मंच पर ओमप्रकाश राजभर और आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी भी थे. इस दौरान पीएम मोदी ने दोनों नेताओं से कुछ चर्चा भी की. रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मेरा इस धरती से अलग ही रिश्ता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ की धरती से लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है. इस दौरान उन्होंने एक मेगा रैली की. 80 लोकसभा सीटों वाला उत्तर प्रदेश पीएम मोदी के लिए बेहद अहम है. क्योंकि उन्होंने आगामी चुनाव में एनडीए गठबंधन के लिए 400 सीटें जीतने का टारगेट सेट किया है. इसके लिए उनका फोकस यूपी पर है. क्योंकि जितनी ज्यादा सीटें इस राज्य से आएंगी, टारगेट अचीव करना उतना आसान होगा. इसके अलावा पीएम मोदी के लिए मेरठ लकी भी रहा है. क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने 2014 और 2019 के चुनावी अभियान का आगाज भी मेरठ से ही किया था. मेरठ में भारतीय जनता पार्टी को करीब 48 फीसदी वोट मिले थे. इन दोनों चुनावों में बीजेपी ने जीत का परचम लहराया था.
मेरठ की रैली में बीजेपी के सहयोगी दल भी शामिल हुए. मंच पर ओमप्रकाश राजभर और आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी भी थे. इस दौरान पीएम मोदी ने दोनों नेताओं से कुछ चर्चा भी की. रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मेरा इस धरती से अलग ही रिश्ता है. 2014 और 2019 में मैंने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत मेरठ से की थी. अब 2024 के चुनाव की पहली रैली मेरठ में हो रही है. इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरठ की धरती क्रांति और क्रांतिवीरों की धरती है. इस धरती ने चौधरी चरण सिंह जैसे महान सपूत देश को दिए हैं.
बीजेपी ने मेरठ से अरुण गोविल पर लगाया दांव
मेरठ से इस बार बीजेपी ने अरुण गोविल चुनावी मैदान में उतारा है. अरुण गोविल के सहारे बीजेपी जाटलैंड जीतने की कोशिश में हैं. 66 साल की उम्र में अरुण गोविल अपनी राजनीतिक पारी का आगाज कर रहे हैं. मशहूर धारावाहिक रामायण में श्रीराम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल एक जाना पहचाना चेहरा हैं. मेरठ सीट से बीजेपी ने अरुण गोविल को जाटलैंड से टिकट देकर हिंदुत्व का क्लियर मैसेज दिया है. मेरठ बीजेपी का अभेद्य किला माना जाता है. पिछले 8 में से 6 चुनावों में बीजेपी ने यहां से जीत हासिल की है.
चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर बीजेपी ने किसे साधा?
चुनाव से पहले बीजेपी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का ऐलान किया था. चरण सिंह को किसानों और गांव-गरीबों के मसीहा कहा जाता था. बीजेपी ने उन्हें भारत रत्न देकर किसान और जाट वोट को साधने की कोशिश की है. बीजेपी के इस ऐलान के बाद ही चौधरी चरण सिंह के पोते और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के प्रमुख जयंत चौधरी भी समाजवादी पार्टी के साथ पुराना नाता तोड़कर सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के खेमे में आ गए थे. बता दें कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जाट बहुल पश्चिमी यूपी की 26 लोकसभा सीटों में से 19 पर जीत हासिल की थी, जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन को 7 सीटें मिली थीं. इस बार बीजेपी उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर रही है.

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