
2012, 2022, 2024...रेप केस में हर बार पीड़ित पक्ष को ट्रोल करती क्यों दिखती हैं ममता बनर्जी?
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ममता बनर्जी की गलतियों की डायरी में रेप सबसे ऊपर हैं. खासकर अगर उनकी पार्टी का कोई व्यक्ति दोषी हो. ममता बनर्जी ने अपनी वर्षों की सत्ता के दौरान साल-दर-साल बलात्कार के कई मामलों को झूठा बताया है. वह खुद पीड़ित हो जाती हैं जब एक महिला नेता के रूप में उनसे बलात्कार के मामलों पर जवाब मांगा जाता है.
अप्रैल 2012 में जब आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन को ट्रांसफर ऑर्डर मिलिता है तो वह हैरान रह जाती हैं, क्योंकि वह नहीं जानती थीं कि हुआ क्या है. सेन उस समय कोलकाता मीडिया की सुर्खियों में छाईं हुईं थी. उन्होंने ही पार्क स्ट्रीट बलात्कार मामले को सुलझाया ही था. कोलकाता पुलिस की संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) दयमंती सेन को उस पद से हटाकर बैरकपुर पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में डीआईजी (प्रशिक्षण) के पद पर तैनात कर दिया गया.
उनकी गलती क्या थी? दरअसल उन्होंने तत्कालीन नई मुख्यमंत्री के दावों की हवा निकालने की हिम्मत दिखाई थी. ममता बनर्जी को राइटर्स बिल्डिंग ( पश्चिम बंगाल सरकार का सचिवालय) में आए एक साल भी नहीं हुआ और तब उन्होंने बलात्कार मामले को 'शाजानो घोटोना' यानी एक नकली घटना कहकर खारिज करते हुए दावा किया कि यह 'अपनी नई सरकार को बदनाम करने की' एक 'मनगढ़ंत घटना' थी.
ममता पहले भी रेप के कई मामले कर चुकी हैं खारिज
दयमंती सेन द्वारा पार्क स्ट्रीट गैंगरेप मामले की जांच करना, मामले को सुलझाना और पांचों दोषियों को पकड़ना शायद दीदी (ममता बनर्जी) अच्छा नहीं लगा. सेन यहां सीएम के खिलाफ हीं चली गईं थी क्योंकि कोई भी दीदी के खिलाफ नहीं जाता था. वह 2012 था और अब 2024 है.. यानि 12 साल में भी कुछ खास बदलाव नहीं हुआ.
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इस दौरान बनर्जी सरकार के दौरान हंसखाली, कामदुनी, काकद्वीप, रानाघाट, सिउरी, संदेशखली जैसे मामले आए. हंसखाली में में हुई रेप की घटना को उन्होंने 'अफेयर' बताकर खारिज कर दिया था जबकि कामदुनी में प्रदर्शनकारियों को उन्होंने 'माकपा समर्थक' बता दिया क्योंकि इन प्रदर्शकारियों ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों सवाल उठाए थे. मई-जून 2021 में पूरे पूरे बंगाल के पुलिस थानों में बलात्कार की शिकायतों को दबा दिया गया, तब उन्होंने चुप्पी साध ली.

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