
हाथरस में मौत की भगदड़, ऐसे लापरवाही लील गई 121 जिंदगियां... आखिर धार्मिक कार्यक्रमों में भीड़ क्यों हो जाती है बेकाबू?
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उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में हुई सत्संग में मची भगदड़ से अब तक 121 लोगों की मौत हो चुकी है. इस सत्संग का आयोजन सिकंदराराउ इलाके के फुलराई गांव में हुआ था. ये सत्संग नारायण साकार हरि उर्फ साकार विश्व हरि का था. इन्हें लोग 'भोले बाबा' बुलाते हैं. भोले बाबा का असली नाम सूरजपाल है.
इस दुर्घटना के बाद अलग-अलग जिलों के अस्पतालों में शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है. आगरा, एटा, हाथरस और अलीगढ़ में पोस्टमार्टम जारी है. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ज्यादातर लोगों की मौत का कारण दम घुटना बताया जा रहा है.
यूपी पुलिस ने सत्संग के आयोजकों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. आरोप है कि इस कार्यक्रम में 80 हजार लोगों के जुटने की अनुमति थी, लेकिन ढाई लाख लोगों को जुटाया गया. हालांकि, FIR में भोले बाबा का नाम दर्ज नहीं है.
FIR में आरोप लगाया गया है कि आयोजकों ने अनुमति मांगते समय सत्संग में आने वाले भक्तों की असल संख्या छिपाई, ट्रैफिक मैनेजमेंट में मदद नहीं की और भगदड़ के बाद सबूत छिपाए.
हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक कार्यक्रम में ऐसी भगदड़ मची हो. इससे पहले भी कई धार्मिक कार्यक्रमों में मची भगदड़ों में दर्जनों मौतें हो चुकी हैं. ढाई साल पहले जनवरी 2022 में जम्मू-कश्मीर के वैष्णो देवी मंदिर में मची भगदड़ में दर्जनभर लोग मारे गए थे.
कैसे मची भगदड़?
हाथरस को भोले बाबा की सत्संग के बाद मची भगदड़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. FIR के मुताबिक, भगदड़ तब मची जब दोपहर दो बजे भोले बाबा अपनी गाड़ी से वहां से निकल रहे थे. जहां-जहां से गाड़ी गुजर रही थी, वहां-वहां से उनके अनुयायी धूल-मिट्टी उठाने लगे. देखते ही देखते लाखों की बेकाबू भीड़ नीचे बैठे या झुके भक्तों को कुचलने लगी और चीख-पुकार मच गई.

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