
सूरत: शवों के अंतिम संस्कार से गल रहीं भट्टियां, ग्रिल दे सकते हैं जवाब
Zee News
सूरत के रामनाथ घेला क्रेमाटोरियम (आरजीसी) के अधिकारी ने बातचीत में कहा कि बर्नर और फ्रेम की लगातार मेंटिनेंस भी जरूरी होती है. लेकिन पिछले कुछ समय से श्मशान घाट में शवों की संख्या काफी बढ़ गई है.
सूरत: गुजरात के सूरत शहर में आधुनिक तरीके से बनाए गए श्मशान घाटों की भट्टियां लगातार धधक रही हैं. पिछले कई दिनों से 24 घंटे इन भट्टियों के चलने की वजह से अब इनके ग्रिल तक जवाब दे रहे हैं. भट्टियों के ग्रिल गल रहे हैं, जिनके टूटते ही सबकुछ थम जाएगा. बता दें कि सूरत में तीन श्मशान घाट गैस चालित हैं. जिनका फ्रेम लोहे का है. इन फ्रेम्स पर शव रखे जाते हैं और थोड़े ही समय में पूरी तरह से शव जल जाते हैं. लेकिन इन तीनों श्मशान घाट पर भीड़ काफी बढ़ गई है और लगातार अंतिम संस्कार का काम चल रहा है. इसकी वजह से इनके ग्रिल पिघल रहे हैं. ये हालात सिर्फ सूरत में ही नहीं है, बल्कि सूरत से लगे बारदोली कस्बे के श्मशान घाट का भी यही हाल है. TOI की खबर के मुताबिक, सूरत के रामनाथ घेला क्रेमाटोरियम (आरजीसी) के अधिकारी ने बातचीत में कहा कि बर्नर और फ्रेम की लगातार मेंटिनेंस भी जरूरी होती है. लेकिन पिछले कुछ समय से श्मशान घाट में शवों की संख्या काफी बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि पहले दिन में करीब 20 शव आते थे. जिसमें से कुछ का अंतिम संस्कार लकड़ी से होता था. और कुछ का गैस की भट्टियों पर. ऐसे में गैस की भट्टियों को ठंडा होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता था. लेकिन अब दिन में करीब 80 शव श्मशान घाट पहुंच रहे हैं. और भट्टियां लगातार काम कर रही हैं. ऐसे में उन्हें ठंडा करने का समय ही नहीं मिल पा रहा. जिसकी वजह से लोहे के फ्रेम गलने-पिघलने लगे हैं और उनके टूटने का खतरा बढ़ गया है.
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