
सिख महिला को कड़ा पहनने पर परीक्षा में बैठने से रोका, दिल्ली HC ने कहा- यह दुर्भाग्यपूर्ण
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दिल्ली में DSSSB द्वारा आयोजित पीजीटी-अर्थशास्त्र (महिला) परीक्षा में एक सिख महिला को इसलिए बैठने की अनुमति नहीं दी गई, क्यों उसने कड़ा पहन रखा था. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.
दिल्ली में एक सिख महिला उम्मीदवार को प्रतियोगी परीक्षा में बैठने से इसलिए मना कर दिया गया, क्योंकि उसने कड़ा पहन रखा था. महिला एडमिट कार्ड में दिए समय के मुताबिक परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले पहुंची थी. इसके बावजूद महिला को कड़ा उतारने के बाद ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई. इस मामले में महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पीजीटी-अर्थशास्त्र (महिला) परीक्षा में बैठने की अनुमति न देने को चुनौती दी. महिला का कहना है कि अधिकारियों की कार्रवाई का बचाव सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि उन्होंने एक अधिसूचना जारी की थी कि कड़ा या कृपाण वाले उम्मीदवार को रिपोर्टिंग समय से कम से कम एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा. याचिकाकर्ता के मुताबिक, ये अधिसूचना परीक्षा के आयोजित होने के दो दिन बाद ही जारी किया गया.
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण - दिल्ली हाईकोर्ट
इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस पल्ली ने कहा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) जैसा निकाय, जो नियमति तौर पर बड़ी संख्या में सिख उम्मीदवारों के साथ परीक्षा आयोजित करता है, ने समय पर उम्मीदवारों को जानकारी नहीं दी, कि अगर वे कड़ा या कृपाण पहनकर आना चाहते हैं, तो उन्हें परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले केंद्र पर पहुंचना होगा. कोर्ट ने DSSSB को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में निकाय द्वारा उचित समय पर जानकारी दी जाए, ताकि इसके चलते परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की कोई कठिनाई न हो.
कोर्ट ने कहा, परीक्षा आयोजित करने वाले निकाय ने पहले इस तरह की सूचना जारी नहीं की. इसके बाद जब तक याचिकाकर्ता ने कड़ा नहीं हटाया, उसे परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया. इसके अलावा उसे उसके कपड़ों की आस्तीन को आधा काटने के लिए कहा. याचिकाकर्ता महिला को परीक्षा में बैठने से गलत तरीके से रोका गया. कोर्ट ने कहा, DSSSB की कार्रवाई स्पष्ट रूप से टिकाऊ नहीं हैं और रद्द किए जाने योग्य है. याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे परीक्षा में फिर से शामिल होने में कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते उसे उम्र में छूट दी गई हो और परीक्षा समयबद्ध तरीके से आयोजित की जा रही हो और अदालत ने अधिकारियों से इस पर उनका जवाब मांगा है.

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