
वज़न कम करने की सस्ती दवाएं मोटापे से जंग को कर सकती हैं आसान
BBC
भारत में सेमाग्लूटाइड का पेटेंट 20 मार्च को ख़त्म होने जा रहा है और अनुमान है कि एक महीने के अंदर भारतीय बाज़ार में इसके जेनेरिक वर्ज़न के 50 ब्रांड आ जाएंगे.
कम से कम सैद्धांतिक रूप से ही, भारत के लोग जल्द ही मोटापे की समस्या से निजात पा सकते हैं. इस शुक्रवार को सेमाग्लूटाइड नाम की दवा का पेटेंट भारत में ख़त्म होने जा रहे है.
डेनमार्क की दवा निर्माता कंपनी नोवो नॉर्डिस्क की ब्लॉकबस्टर वेट-लॉस दवा वेगोवी और ओज़ेम्पिक में सेमाग्लूटाइड का इस्तेमाल होता है.
पेटेंट ख़त्म होने के बाद घरेलू फ़ार्मास्यूटिकल कंपनियां बड़े पैमाने पर सेमाग्लूटाइड के सस्ते या जेनेरिक वर्ज़न बनाना शुरू कर देंगी. इसके बाद होने वाली होड़ के कारण दाम काफ़ी गिर सकते हैं.
इससे भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों में इसकी उपलब्धता बढ़ जाएगी.
इनवेस्टमेंट बैंक जेफ़्रीज़ ने इसे भारत के लिए संभावित 'मैजिक पिल मूवमेंट' करार देते हुए कहा है कि सेमाग्लूटाइड की घरेलू मार्केट एक अरब डॉलर तक पहुंच सकती है.
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भारतीय फ़ार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री पर नज़र रखने वालों का अनुमान है कि एक महीने के अंदर सेमाग्लूटाइड की जेनेरिक दवा के क़रीब 50 ब्रांड भारतीय बाज़ार में आ सकते हैं.













