
ट्रांसजेंडर पहचान पर नया विवाद, क्या कहता है संशोधन विधेयक
BBC
लोकसभा के मौजूदा सत्र में बीती 13 मार्च को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 पेश किया गया, जिसमें पहचान की परिभाषा बदलने का प्रस्ताव है.
लोकसभा के मौजूदा सत्र में बीती 13 मार्च को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 पेश किया गया.
इस संशोधन में ट्रांसजेंडर पहचान की परिभाषा बदलने का प्रस्ताव है. इस संशोधन में 'जेंडर सेल्फ़-आइडेंटिफ़िकेशन' (स्व-पहचान) को मान्यता नहीं दी गई है.
सरकार का कहना है कि यह संशोधन लाना ज़रूरी था. उसके मुताबिक़, साल 2019 के क़ानून को लागू करने में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा है.
इसीलिए ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा को दोबारा परखना ज़रूरी था ताकि क़ानून का फ़ायदा केवल उन्हीं लोगों को मिले जिन्हें वास्तव में इसकी ज़रूरत है.
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संशोधन विधेयक आने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसजेंडर समुदाय के कुछ तबक़ों में नाराज़गी देखी जा रही है.
समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों के मुताबिक़, यह संशोधन ट्रांसजेंडर पहचान को ख़तरे में डाल देगा. उनका यह भी आरोप है कि यह विधेयक ट्रांस पहचान को आपराधिक नज़रिए से देखता है.













