
लगातार हो रही मौतें, इसके बाद भी हीटवेव क्यों है डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट से बाहर, कौन-कौन सी आपदाएं लिस्ट में?
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देश के बहुत से हिस्सों में गर्मी का कहर जारी है. इस बीच हीटस्ट्रोक के 25 हजार से ज्यादा संभावित मामलों के अलावा मार्च से मई के बीच लगभग 60 मौतें हो चुकीं. एक्सट्रीम गर्मी से हर साल ही नुकसान होता है, लेकिन अब तक इसे डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट में जगह नहीं मिल सकी.
उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में भीषण गर्मी का दौर थोड़ी राहत के बाद फिर से शुरू हो चुका. मौसम विभाग लोगों को हीटवेव से संभलकर रहने की चेतावनी दे रहा है. ज्यादातर राज्यों में स्कूल बंद पड़े हैं. इस बीच चर्चा हो रही है कि हीटवेव इतनी खतरनाक आपदा होने के बाद भी क्यों इसे डिजास्टर नहीं माना जा रहा. जानिए क्या होगा अगर गर्मी को डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट में शामिल कर लिया जाए.
साल 1999 में उड़ीसा में सुपर साइक्लोन आया था. लगभग 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तट से टकराए तूफान की वजह से 10 हजार लोगों की मौत हुई, और लाखों लोग बेघर हो गए थे. तभी पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट पर बात शुरू हुई. इस बीच 2004 में सुनामी आ गया. इसके सालभर बाद ही डीएम एक्ट लागू हुआ. इसमें कुदरती और इंसानी वजहों से आई आपदा, जिसमें जानमाल, पर्यावरण का नुकसान होता हो, शामिल है.
किन घटनाओं को इस कैटेगरी में रखा जाता है प्राकृतिक या इंसानों की वजह से आई कोई भी आपदा, जिससे जान जा सकती हो, प्रॉपर्टी का भारी नुकसान होता हो, या फिर पर्यावरण को गंभीर हानि हो, ये सभी डीएम एक्ट में आते हैं. साथ ही साथ डिजास्टर ऐसा हो, जो लोगों की सहने की क्षमता से बाहर हो.
किस तरह बंटता है फंड
ऐसे इवेंट्स दिखने पर उनपर डीएम एक्ट लागू हो जाता है. इसके बाद प्रभावित राज्य दो फंडों से पैसे निकाल सकता है- नेशनल लेवल पर एनडीआरएफ और स्टेट के स्तर पर एसडीआरएफ. स्टेट्स को कहा जाता है कि वे पहले स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड का उपयोग करें. अगर इसके बाद भी मामला संभल न रहा हो, ज्यादा पैसों की जरूरत पड़े तो राज्य एनडीआरएफ से मदद ले सकते हैं.

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