
रोहित शर्मा का ODI कैप्टेंसी रिकॉर्ड बेहद दमदार, धोनी-कोहली तो इस मामले में काफी पीछे
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रोहित शर्मा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए स्पेशलिस्ट बैटर के तौर पर टीम में शामिल किए गए हैं. रोहित शर्मा आईपीएल 2025 के बाद पहली बार प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने उतरेंगे.
भारतीय क्रिकेट में अब नए दौर की शुरुआत हो गई है. शुभमन गिल को रोहित शर्मा की जगह 4 अक्टूबर (शनिवार) को भारत की वनडे टीम का कप्तान बनाया गया. शुभमन गिल का पहला असाइनमेंट 19 अक्टूबर से शुरू हो रहा ऑस्ट्रेलिया दौरा होगा, जहां वो तीन मैचों की वनडे सीरीज में भारतीय टीम की कमान संभालेंगे.
रोहित शर्मा पहले ही टी20 इंटरनेशनल और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके थे. ऐसे में वो सिर्फ वनडे प्रारूप में खेलने के उपलब्ध हैं. रोहित का वनडे में कप्तानी रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा. उन्होंने भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए. रोहित की कप्तानी में भारतीय टीम ने चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 पर कब्जा किया. इससे पहले उनकी कप्तानी में भारतीय टीम 2018 और 2023 का एशिया कप जीतने में भी सफल रही. साथ ही 2023 के वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में भी पहुंची.
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रोहित शर्मा आंकड़ों के हिसाब से भारत के सफलतम वनडे कप्तानों में शुमार हो चुके हैं. रोहित की कप्तानी में भारतीय टीम ने 56 में से 42 ओडीआई मुकाबले जीते, जबकि एक मुकाबला टाई और एक मैच बेनतीजा रहा. यानी रोहित की कप्तानी में जीत का प्रतिशत 75 रहा. कम से कम 50 वनडे मैचों में कप्तानी करने वाले खिलाड़ियों में सिर्फ क्लाइव लॉयड (76.2%) ही रोहित से आगे रहे. रोहित का यह रिकॉर्ड विराट कोहली (68.4%) और महेंद्र सिंह धोनी (55%) से तो काफी बेहतर है.
मल्टी नेशन टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन
रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने मल्टी नेशन टूर्नामेंट्स (5 प्लस टीम) में 27 मैचों में 24 जीत दर्ज की. इस दौरान भारतीय टीम ने सिर्फ 2 मुकाबले गंवाए. यानी जीत का प्रतिशत 88.8 रहा, जो मल्टी नेशन टूर्नामेंट में 20 या उससे ज्यादा वनडे मैचों में कप्तानी करने वाले 27 कप्तानों में सबसे बेहतर है.

टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती को लेकर आगाह किया है. उनका मानना है कि ओस के कारण स्पिन और तेज गेंदबाजी के संतुलन को लेकर टीम मैनेजमेंट को मुश्किल फैसले लेने पड़ेंगे. कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती को एक साथ खिलाना या नहीं, यही भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल होगा.












