
रेस्क्यू ऑपरेशन में मशीनों को मात दे रहे हैं कुत्ते, मलबे में ढूंढ रहे हैं जिंदगी के निशां
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तुर्की और सीरिया में 6 फरवरी को आए भूकंप के बाद सबसे बड़ी दिक्कत मलबे में फंसे जिंदा लोगों को बचाना है. ऐसे में स्निफर डॉग्स काफी काम आ रहे हैं. भारत की ओर से भेजी गई NDRF की टीम में चार स्निफर डॉग्स भी हैं, जो अब तक कई जिंदगियां बचा चुके हैं. ऐसे में जानिए इन डॉग्स को कैसे ट्रेनिंग दी जाती है.
रोमियो, जूली, हनी और रैम्बो... ये चारों स्निफर डॉग्स हैं. और NDRF की उस टीम का हिस्सा हैं, जो रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तुर्की पहुंची है. ये चारों लेब्राडोर ब्रीड के डॉग हैं और इन्हें सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन की बेहतर ट्रेनिंग मिली है.
बारिश और कड़ाके की सर्दी की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रहीं दिक्कतों को इन स्निफर डॉग्स ने थोड़ा आसान कर दिया है. इन चारों डॉग्स की वजह से अब तक कई जिंदगियां बचाई जा चुकीं हैं. कुछ शव भी निकाले गए हैं.
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के और भी देशों ने मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए स्निफर डॉग्स भेजे हैं. इनका मकसद सिर्फ ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां बचाना है. मेक्सिको, क्रोएशिया, चेक रिपब्लिक, जर्मनी, ग्रीस, लिबिया, पोलैंड, स्विट्जरलैंड, यूके और अमेरिका समेत कई देशों ने स्निफर डॉग्स भेजे हैं.
एक ओर जहां तुर्की में सेना मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनरी और इक्विपमेंट्स का इस्तेमाल कर रही है तो दूसरी ओर भारत के ये स्निफर डॉग्स मलबे के ऊपर से जिंदगियां ढूंढने में मदद कर रहे हैं.
स्निफर डॉग्स कैसे बचा रहे हैं जिंदगियां?
ये चारों स्निफर डॉग्स NDRF की दो अलग-अलग टीम के साथ हैं. ये स्निफर डॉग्स मलबे के ऊपर से ही इंसानी गंध को सूंघते हैं और उसका सिग्नल दे रहे हैं.

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