
रूस से तेल खरीद मामले पर भारत की चुप्पी के क्या हैं मायने?
BBC
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक दावा मोदी सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करता दिख रहा है.
बीते साल जब अमेरिका ने रूस से तेल ख़रीदने को लेकर भारत पर 25% के अतिरिक्त टैरिफ़ की घोषणा की थी, तब रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने समाचार एजेंसी स्पुतनिक को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी टैरिफ़ को 'अनुचित, अव्यवहारिक और ग़लत' बताया था.
उन्होंने कहा था कि 'भारत सरकार की नीति सबसे पहले राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की है, व्यापार व्यावसायिक आधार पर होता है, और अगर सौदा सही है, तो भारतीय कंपनियां सबसे अच्छे विकल्प से तेल खरीदेंगी.'
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से भारत-रूस संबंधों पर पश्चिमी देशों का भी ख़ासा दबाव देखने को मिला है.
तेल आयात पर ये विरोध कई बार सामने आया है.
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बीते तीन सालों में भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस सवाल का सामना किया है कि आख़िर भारत रूस से तेल आयात करना बंद क्यों नहीं कर देता.
जवाब में जयशंकर हमेशा यही कहते सुनाई दिए कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा का निर्धारण अपने हिसाब से तय करेगा. कोई और देश या समूह उसे डिक्टेट नहीं कर सकता.













