
नेतन्याहू ने कहा, 'हमने ईरान के गैस फ़ील्ड पर अकेले ही हमला किया था'
BBC
अपने बयानों के ज़रिए नेतन्याहू साफ़ तौर पर ये जताने की कोशिश कर रहे हैं कि इसराइल ने अमेरिका को इस लड़ाई में नहीं घसीटा है. वो ये साबित करने की कोशिश भी कर रहे हैं कि दोनों देशों के लक्ष्य एक-दूसरे से अलग नहीं हैं.
बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस बात से इनकार किया है कि मौजूदा ईरान युद्ध में इसराइल ने अमेरिका को 'जबरन खींच लिया है.'
एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसराइली प्रधानमंत्री ने कहा, "क्या वाकई किसी के ज़ेहन में ये बात आ सकती है कि हम राष्ट्रपति ट्रंप को बताएं कि क्या करना है? कम ऑन."
28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे. इनमें ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई समेत वहां के कई आला नेता और सैन्य अधिकारी मारे जा चुके हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर चल रही बातचीत में जब प्रगति नहीं हो पाई, उसके बाद ये हमले किए गए.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लगातार इस बात को नकारते रहे हैं कि 'इसराइल ने उन्हें लड़ाई में शामिल होने के लिए मजबूर किया.'
इस महीने की शुरुआत में व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ट्रंप ने कहा था, "हो सकता है मैंने उन्हें मजबूर किया हो. देखिए, हम इन पागलों (ईरान) के साथ बातचीत कर रहे थे, और मेरा मानना था कि वे पहले हमला करने वाले थे."
हालांकि, इस बात को लेकर सवाल उठे हैं कि क्या अमेरिका और इसराइल अभी भी ईरान युद्ध को लेकर पूरी तरह से एकमत हैं, खासकर तब जब ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर इसराइल के हमले की इशारों में आलोचना की और कहा कि उन्हें इसके बारे में 'कुछ नहीं पता था'













