
क़तर की गैस फ़ील्ड पर ईरानी हमले के बाद क्या भारत का ऊर्जा संकट और गहरा हो जाएगा?
BBC
बुधवार को खाड़ी के दो बड़ी गैस फ़ील्ड पर इसराइल और ईरान के हमलों से लिक्विफाइड नेचुरल गैस का संकट गहरा गया है. भारत पर भी इसका असर पड़ेगा.
खाड़ी देशों के बड़े गैस भंडार वाले इलाकों में गिर रही मिसाइलों ने पहले से कमजोर वैश्विक एनर्जी सुरक्षा को और ख़तरे में डाल दिया है.
इसकी वजह से तेल की कीमतों में गुरुवार को तेज़ उछाल दर्ज की गई. एशिया में शुरुआती ट्रेड में ब्रेंट कच्चा तेल 4% के उछाल के साथ 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि अमेरिकी कच्चा तेल 3% के उछाल के साथ 99.27 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया.
दुनिया की सबसे बड़ी नेचुरल गैस फ़ील्ड में से एक ईरान की साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर इसराइली हमले और इसके जवाब में क़तर के रास लाफ़ान की एलएनजी गैस फ़ील्ड पर हमले के बाद क़ीमतों में उछाल दर्ज किया गया.
बुधवार को क़तर एनर्जी ने कहा कि ईरान के मिसाइल हमलों से रास लाफ़ान में भारी नुकसान हुआ है. यह क़तर की मुख्य एलएनजी प्रोसेसिंग साइट है और देश के ऊर्जा नेटवर्क का अहम केंद्र है.
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सऊदी अरब ने कहा कि उसने भी रियाद की ओर दागी गई चार बैलिस्टिक मिसाइलों को रोककर नष्ट कर दिया. साथ ही एक गैस फैसिलिटी पर ड्रोन हमले की कोशिश भी नाकाम की गई.
रास लाफ़ान पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अब इसराइल ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर हमले नहीं करेगा. साथ ही चेतावनी दी कि अगर ईरान ने दोबारा लाफ़ान पर हमला किया तो अमेरिका उसके ऊर्जा ढांचे को बर्बाद कर देगा.













