
ये गलियां, ये चौबारा...,75 साल बाद पाकिस्तान में अपने पुश्तैनी घर पर दूसरे की नेमप्लेट देख क्या बोलीं रीना छिब्बर?
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90 साल की रीना छिब्बर वर्मा ने आखिरकार अपने सपने को पूरा कर लिया. वह बुधवार को रावलपिंडी के अपने पुश्तैनी घर पहुंची और बचपन की यादों को फिर से ताजा किया. रीना अपने परिवार के साथ 75 साल पहले 1947 में बंटवारे के बाद रावलपिंडी से भारत आ गई थीं.
90 साल की भारतीय महिला रीना छिब्बर वर्मा 75 साल के इंतजार के बाद बुधवार को अपने उस पुश्तैनी घर लौटीं, जिसे वह भारत, पाकिस्तान बंटवारे के बाद छोड़ आई थीं. रावलपिंडी के अपने इस घर पहुंचकर रीना ने उन यादों को फिर से ताजा किया. वह कहती हैं कि इस घर की यादें उनके जेहन में अभी भी हैं.
रीना के रावलपिंडी के इस पुश्तैनी घर 'प्रेम निवास' में अब उनके पुराने पड़ोसियों के पोते, पोतियां रहते हैं. इस घर को रिनोवेट किया गया है लेकिन दीवारों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. अब इस घर के बाहर लगी नेमप्लेट पर डॉक्टर मुमताज हुसैन का नाम लिखा हुआ है.
यह घर रीना के पिता ने अपनी जमापूंजी से बनवाया था. वह कहती हैं, मेरे पिता ने बहुत मेहनत से यह घर बनाया था. मुझे खुशी इस बात की है कि यह घर तकरीबन वैसे का वैसा ही है, जैसा पहले था. थोड़ा बहुत ही बदलाव हुआ है. यहां जो लोग रह रहे हैं, वो भी बहुत प्यारे लोग हैं.
वह कहती हैं, जब हम रावलपिंडी का अपना यह घर छोड़कर जा रहे थे तो हमारे सारे पड़ोसी दुखी थे.
इस दौरान उन्होंने अपने घर, गली, मोहल्ले को याद करते हुए ये गलिया, ये चौबारा गाने को ट्विस्ट देकर गाया. रीना ने गाया, "ये गलियां, ये चौबारा, यहां आना है दोबारा.."
रीना उस दौर को याद कर कहती हैं, यहां का खाना और दोस्त अभी भी मेरे जेहन में हैं. यहां तक कि आज भी इन गलियों की खुशबू पुरानी यादें ताजा कर देती हैं. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी यहां वापस आ सकूंगी. दोनों देशों की संस्कृति एक ही है. हम सभी एक-दूसरे से मिलना चाहते हैं.

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