
मौत की सजा से पहले आई चिट्ठी, मिर्गी के दौरे को 'परम आनंद' बताया... जिंदगी से दोस्तोवस्की का रोमांस!
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पांच साल के व्यक्तिगत नरक को झेले बिना फ्योदोर दोस्तोवस्की उन महान उपन्यासों को लिखने में असमर्थ होते जिनके लिए वे सबसे प्रसिद्ध हैं. अपने मिर्गी के दौरे के क्षणों में 'परम क्षण' को अनुभव करने वाले दोस्तोवस्की ने मानवता के समक्ष तीखे सवाल खड़े किए. उनकी रचना क्राइम एंड पनशिमेंट में एक पात्र पूछता है क्या 'असाधारण' व्यक्ति नैतिक नियमों से ऊपर हैं?
फायरिंग स्क्वैड सजा बस मुकम्मल करने ही वाली थी. फायर खुलता और गुनहगार बताए गए लोगों के चिथड़े उड़ जाते. सेंट पीट्सबर्ग के सेमेनोव्स्की चौक पर तमाशाइयों का एक हुजूम इस मजमे को देखने के लिए अधीर हुआ जा रहा था. यहां 15 विद्रोहियों की मौत की सजा दी जानी थी. इसी सदमे में एक दोषी ने दूसरे की ओर मुड़कर कहा- 'बस अब हम ईसा मसीह के साथ रहेंगे.' लेकिन वह व्यक्ति, जो नास्तिक था, मुड़ा, मुस्कुराया और धरती की ओर इशारा करते हुए कहा- एक मुट्ठी धूल.
इसके बाद सदमे से भरे मृ्त्यु का इंतजार कर रहे सवाल पूछने वाले कैदी ने ऐसा अनुभव किया जिसे आगे चलकर उसने रहस्यमयी आतंक कहा. इधर जनता की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. मृत्यु की प्रतीक्षा लंबी हो चली थी.
पंद्रह दोषियों को तीन-तीन के समूहों में मौत की सजा देने के लिए कतार में खड़ा किया गया. ये कैदी दूसरे ग्रुप में था. जब पहला समूह फायरिंग दस्ते के सामने खड़ा हुआ. तभी कुछ चमत्कार सा घटित हुआ. वो चमत्कार नहीं जहां अलौकिक शक्तियों का दखल रहता है. यहां रूस के सम्राट (जार) की शाही घोड़ागाड़ी आती है और एक पत्र अधिकारियों को सौंपा जाता है.
मृत्यु के दरवाजे से दस्तक देकर वापसी
तुरंत मुनादी होती है कि इन दोषियों की मृत्यु की सजा माफ कर दी गई है. सेमेनोव्स्की चौक हैरान था और 15 जिंदगियां कातर निगाहों से अपनी जिंदगी की नई किस्त को देख रही थीं.
इस सजा की वजह, मृत्यु के दरवाजे को दस्तक देकर वापसी का वृतांत हम आपको आगे बताएंगे.

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