'मेरे कमरे का भी AC बंद कर दो...', बढ़े हुए बिजली बिलों पर PAK के कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग
AajTak
पाकिस्तान में बढ़े हुए बिजली बिलों के खिलाफ मुल्तान, लाहौर और कराची समेत देश भर के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए. इसके मद्देनजर अत्यधिक बिजली बिलों की शिकायतों को दूर करने के लिए काकर द्वारा पीएम कार्यालय (पीएमओ) में बुलाई गई आपातकालीन बैठक में निर्देश जारी किए गए.
पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर उल हक काकर ने बढ़े हुए बिजली बिलों पर लोगों के आक्रोश के बीच रविवार को एक आपातकालीन बैठक की. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को बिजली बिलों में कटौती के लिए अगले 48 घंटों के भीतर ठोस प्लान तैयार करने का निर्देश दिया. दरअसल, बढ़े हुए बिजली बिलों के खिलाफ मुल्तान, लाहौर और कराची समेत देश भर के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए. इसके मद्देनजर अत्यधिक बिजली बिलों की शिकायतों को दूर करने के लिए काकर द्वारा पीएम कार्यालय (पीएमओ) में बुलाई गई आपातकालीन बैठक में निर्देश जारी किए गए.
उन्होंने बैठक में कहा, "हम जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे देश को नुकसान हो. हम ऐसे कदम उठाएंगे जिससे राष्ट्रीय खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा और उपभोक्ताओं को सुविधा होगी. यह संभव नहीं है कि जब लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़े, तब भी उच्च पदस्थ अधिकारी और प्रधानमंत्री लोगों द्वारा भुगतान किए गए करों से मुफ्त बिजली का उपभोग करना जारी रखें.
पीएमओ की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, उन्होंने संबंधित विभागों और मंत्रालयों को उन अधिकारियों का विवरण सौंपने का निर्देश दिया, जिन्हें मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है. प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं आम आदमी का प्रतिनिधित्व करता हूं. पीएम हाउस और पाक सचिवालय में बिजली की खपत को कम करने के लिए उपाय लागू किए जाएंगे. भले ही मेरे कमरे में एयर कंडीशनर बंद करना पड़े तो कर दो.”
पीएमओ के बयान में कहा गया है कि अगली बैठक सोमवार को होगी. सोमवार की बैठक के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह जुलाई के अत्यधिक बिलों और ऊर्जा संरक्षण के उपायों के कार्यान्वयन पर प्रांतीय मुख्यमंत्रियों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे. उन्होंने बिजली वितरण कंपनियों से बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए एक रोडमैप मांगते हुए संबंधित अधिकारियों को बिजली क्षेत्र में सुधारों के लिए एक लघु, मध्यम और दीर्घकालिक योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.







