
मुस्लिम देशों के संगठन OIC ने हिजाब विवाद को लेकर दी तीखी प्रतिक्रिया
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OIC ने भारत के कर्नाटक में हालिया हिजाब विवाद को लेकर चिंता जताई है. मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन हिंसा और धर्म संसद के मुद्दे पर भी ओआईसी ने भारत को घेरा है. संगठन का कहना है कि भारत सरकार मुसलमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करे.
इस्लामिक देशों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (Organization Of Islamic Cooperation) ने भारत में मुस्लिमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. कर्नाटक हिजाब विवाद, मुस्लिम महिलाओं को ऑनलाइन निशाना बनाए जाने और हरिद्वार धर्म संसद पर बोलते हुए ओआईसी के महासचिव हुसैन इब्राहिम ताहिर ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि इसे लेकर जरूरी कदम उठाए जाएं. The General Secretariat of the Organization of Islamic Cooperation (#OIC) expresses deep concern over recent public calls for #genocide of #Muslims by the ‘#Hindutva’ proponents in #Haridwar in the State of #Uttarakhand… pic.twitter.com/9Qh7VVe9dl

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








