
महिला वोटरों की तादाद बढ़ी लेकिन संसद में कहां तक पहुंची है भागीदारी?
BBC
भारत में महिलाएं लगभग पुरुषों जितनी संख्या में वोट डालती हैं, और कई राज्यों में तो उनसे भी ज़्यादा. लेकिन भागीदारी में ज़बरदस्त बढ़ोतरी के बावजूद संसद या विधानसभाओं में उनकी संख्या काफ़ी कम है.
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह समझना ज़रूरी है कि भारत की महिलाएं राजनीति में बतौर हिस्सेदार कहां तक पहुंची हैं और उनकी भागीदारी के सामने आज भी कौन-सी बाधाएं हैं.
पिछले छह दशकों में महिलाओं का चुनावी राजनीति से रिश्ता काफ़ी बदला है. आज महिलाएं लगभग पुरुषों जितनी संख्या में वोट डालती हैं, और कई राज्यों में तो उनसे भी ज़्यादा.
लेकिन भागीदारी में यह ज़बरदस्त बढ़ोतरी प्रतिनिधित्व या राजनीतिक ताक़तवर में उसी अनुपात में नहीं बदल पाई है.
भारत का अनुभव एक दिलचस्प विरोधाभास दिखाता है. वोट देने में बराबरी है, लेकिन राजनीतिक ढांचे में बराबरी अब भी नहीं है.
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आज़ादी के बाद के दशकों में चुनावों में हिस्सा लेने को लेकर महिलाओं और पुरुषों के बीच साफ़ अंतर दिखता था.













