
महाराष्ट्र में KCR की एंट्री, 'सामना' में तंज- वोट काटने के लिए BJP लेकर आई
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तेलंगाना सीएम केसीआर ने पिछले दिनों महाराष्ट्र में पढरपुर से करीब 20 किमी. दूर सरकोली गांव में एक रैली को संबोधित किया था. उन पर बीजेपी की बी टीम होने का आरोप लग रहा है. वहीं शिवसेना (यूटीबी) के मुखपत्र सामना ने संपादकीय में उनकी आलोचना की. उन पर नेताओं को धन-बल से अपनी पार्टी में शामिल करने का आरोप लगाया. संपादकीय में यह भी लिखा कि केसीआर की क्षेत्रीय पार्टी अच्छा प्रदर्शन कर रही थी.
सामना पत्रिका ने अपने संपादकीय में तेलंगाना सीएम के चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर जमकर हमला बोला है. लेख में इस बात का दावा किया केसीआर तेलंगाना और महाराष्ट्र दोनों ही जगह चुनाव हार जाएंगे. लेख में चुनाव के लिए धनबल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अगर केसीआर तेलंगाना में अपनी गिरावट का बदला महाराष्ट्र में ले रहे हैं तो वह राष्ट्रीय हित में अहित कर रहे हैं.
सामना में लिखा गया कि केसीआर को महाराष्ट्र में घुसने की कोई जरूरत नहीं थी. तेलंगाना के लिए संघर्ष करने के बावजूद उनकी पार्टी नीचे जा रही है, उनकी बेटी लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकीं. उन्हें ईडी ने समन भेज दिया, जिसके बाद केसीआर का हर कदम से ऐस लगा रहा है कि वे केवल बीजेपी को फायदा पहुंचाएंगे. संपादकीय में आगे लिखा- ओवैसी का मुख्यालय भी हैदराबाद है. वह वोट बांटने के लिए पहले ही महाराष्ट्र के कई हिस्सों में जा चुके हैं, लेकिन अब यह स्पष्ट है कि मुस्लिम और दलित एआईएमआईएम पर विश्वास नहीं करेंगे.
क्या यही वजह है कि बीजेपी अब केसीआर को मैदान में उतार रही है. यहां तक कि पवार ने पूछा है कि क्या बीआरएस बीजेपी की बी टीम है जो महाराष्ट्र में आधार खो रही है इसलिए इस तरह की हरकतें कर रही है.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने भारत राष्ट्र समिति नामक पार्टी की स्थापना करके राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने का निर्णय लिया. हालांकि, इसकी कोई जरूरत ही नहीं थी. उनकी एक क्षेत्रीय पार्टी थी और वह अच्छा प्रदर्शन कर रही थी. तेलंगाना राज्य की स्थापना में के. चंद्रशेखर राव का संघर्ष बड़ा है. यह भी उतना ही सच है कि अगर राव ने संघर्ष नहीं किया होता तो तेलंगाना राज्य का निर्माण नहीं होता. राव दो बार तेलंगाना के मुख्यमंत्री बने. वहां के किसानों के जीवन स्तर में सुधार हो, ऐसी कई योजनाओं को उन्होंने सफलतापूर्वक लागू किया है, तब भी उनकी पार्टी तेलंगाना में गिरावट पर है. केसीआर की पार्टी 2024 में सत्ता में रहेगी या नहीं, इसकी कोई भी गारंटी नहीं दे सकता है.
केसीआर की बेटी कविता 2019 के लोकसभा चुनाव में हार गईं. इन्हीं कविता को दिल्ली में शराब घोटाला मामले में ‘ईडी’ ने पूछताछ के लिए बुलाया था. कविता ने दिल्ली की ‘आप’ सरकार और तेलंगाना में कुछ शराब ठेकेदारों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई और इसके लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों ने केसीआर की बेटी के खिलाफ जांच शुरू की, जिसके बाद केसीआर ने कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी दबाव की राजनीति कर रही है, लेकिन हम उनके सामने नहीं झुकेंगे, हम लड़ते रहेंगे. हालांकि इसके बाद वे जो राजनीतिक कदम उठा रहे हैं, वो ऐसे हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी को फायदा पहुंचाएंगे.

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