
भारत में फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी मिलने में क्यों हो रही देरी? यहां फंसा है पेच
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वैक्सीन के मसले पर फाइजर के साथ समझौते को ठोस रूप दिया जाना केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण है. लेकिन फाइजर की वैक्सीन को लेकर इस मामले से परिचित केंद्र सरकार के दो सूत्रों ने बताया कि फाइजर के साथ पूरी समस्या क्षतिपूर्ति बॉन्ड को लेकर है.
भारत में अपनी कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल पर किसी भी दावे से कानूनी सुरक्षा की मांग को लेकर अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं. भारत ने कोरोना वैक्सीन के किसी निर्माता को किसी भी गंभीर दुष्प्रभाव के मुआवजे की लागत से सुरक्षा नहीं दी है. असल में, फाइजर ने कई देशों में यह शर्त रखी है जहां पर उसकी वैक्सीन की डोज पहले से ही दी जा रही हैं. इसमें ब्रिटेन और अमेरिका भी शामिल हैं. वैक्सीन को लेकर इस मामले से परिचित केंद्र सरकार के दो सूत्रों ने बताया कि फाइजर के साथ पूरी समस्या क्षतिपूर्ति बॉन्ड को लेकर है, हमें इस पर क्यों हस्ताक्षर करने चाहिए?' माना जा रहा है कि कानूनी सुरक्षा के मामले को लेकर ही भारत में फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी देने का मामला लटका हुआ है. भारत को दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक माना जाता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

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ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?








