
भारत के लिए क्यों अहम हैं नेपाल के चुनाव?
BBC
भारतीय विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल के प्रति भारत की नीति में बदलाव की संभावना कम है. लेकिन कुछ भारतीय जानकार इन चुनावों के बाद नेपाल की 'सत्ता के संतुलन' में संभावित बदलाव देख रहे हैं.
नेपाल में पांच मार्च को होने वाले चुनावों से पहले कुछ भारतीय विश्लेषकों ने टिप्पणी की है कि उन्हें यहां किसी को भी बहुमत मिलने की संभावना नहीं दिखती और ज़रूरत पड़ने पर भारत अपनी नीति में बदलाव कर सकता है.
भारतीय सेना के एक रिटायर जनरल ने कहा है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने वामपंथी दलों की सीटों में कमी का विश्लेषण किया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत, जिसने अपनी विदेश नीति में 'पड़ोसी पहले' का सिद्धांत अपनाया है, चुनावों के बाद अपनी नेपाल नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में कोई भी दल आए, भारत नेपाल को उसके राजनीतिक बदलाव के दौर में सहयोग करेगा.
वहीं, एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि नेपाल में जो भी दल सत्ता में आएगा, भारत उसके साथ सहयोग करेगा और नेपाल की इच्छा के अनुसार 'शांति, विकास और स्थिरता' के लिए मदद करेगा.
हाल के वर्षों में, नेपाल में राजशाही के साथ एक हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग बढ़ रही है, जबकि भारत में, हिन्दू राष्ट्रवादी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर झुकाव रखने वाली आबादी का एक वर्ग इस मुद्दे के प्रति सहानुभूति रखता है.
हालांकि, भारतीय अधिकारी इन मुद्दों से खुद को दूर रखने की कोशिश करते दिख रहे हैं, और जैसे-जैसे मतदान की तारीख क़रीब आ रही है, भारत नेपाली सरकार को चुनाव कराने के लिए आवश्यक साजोसामान मुहैया करा रहा है.













