
भारत के तेवर दिखाने का नहीं पड़ा असर, सऊदी अरब ने लिया बिल्कुल उल्टा फैसला
AajTak
सऊदी अरब ने कच्चे तेल के दामों यानी आधिकारिक बिक्री मूल्य में 20-30 फीसदी की वृद्धि की है. सऊदी अरब की सरकारी कंपनी सऊदी अरामको अनुबंधों के तहत हर महीने तेल के दाम का निर्धारण कर करती है. बहरहाल, अन्य पश्चिमी एशियाई उत्पादक देशों ने अपनी तेल की कीमतों को कम करने के संकेत दिए हैं.
सऊदी अरब ने मई में एशिया के लिए भेजे जाने वाले तेल के दाम बढ़ा दिए हैं जबकि यूरोप के लिए ईंधन के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सऊदी अरब ने रविवार को आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान कर दिया. इस घोषणा के साथ ही दुनिया के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता ने साफ कर दिया कि सऊदी अरब से तेल आयात में कटौती करने के भारत के फैसले से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. (फोटो-रॉयटर्स) ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट बताती है कि सऊदी अरब ने कच्चे तेल के दामों यानी आधिकारिक बिक्री मूल्य (OSP) में 20-30 फीसदी की वृद्धि की है. सऊदी अरब की सरकारी कंपनी सऊदी अरामको अनुबंधों के तहत हर महीने तेल के दाम का निर्धारण करती है. बहरहाल, अन्य पश्चिमी एशियाई उत्पादक देशों ने अपनी तेल की कीमतों को कम करने के संकेत दिए हैं. (फोटो-रॉयटर्स)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?








