
बगावत, वैगनर आर्मी का मार्च और समझौता... पुतिन पर 24 घंटे भारी गुजरे, प्रिगोझिन की कौन सी शर्तें माननी पड़ीं?
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रूस में प्राइवेट आर्मी वैगनर द्वारा पिछले 24 घंटे से जारी बगावत थम गई. बेलारूस के राष्ट्रपति ने रूस और वैगनर चीफ प्रिगोझिन के बीच सुलह कराई. येवगेनी प्रिगोझिन ने अपनी सेना पीछे हटाने का फैसला किया. उन्होंने कहा, खून खराबे से बचने के लिए पीछे हटने का फैसला किया है. अब प्रिगोझिन इस समझौते के तहत बेलारूस में रहेंगे. हालांकि, इस विद्रोह के लिए उनके लड़ाकों पर कोई केस नहीं होगा.
रूस के जिस पावरफुल राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला करके अमेरिका, यूरोप और नाटो देशों को खुली चुनौती दे दी थी, उन्हीं पुतिन को शनिवार को हुई बगावत ने घर में ही फंसा दिया. ये बगावत थी रूस की प्राइवेट आर्मी वैगनर की, जिनके सैनिकों ने दो शहरों पर कब्जा कर लिया था और मास्को की ओर मार्च का ऐलान कर दिया था. अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर आकर टिक गई थीं कि पुतिन घर में हुई इस बगावत से कैसे निपटेंगे? क्या ये पुतिन के दशकों से चल रहे एकछत्र राज का अंत है? लेकिन 24 घंटे में ही पुतिन ने फिर गेम पलट दिया और दुनिया को ये मैसेज दिया कि दुनिया के पावर गेम में पिक्चर अभी बाकी है.
लेकिन रूस में प्राइवेट आर्मी वैगनर द्वारा जारी बगावत भले ही 24 घंटे में थम गई हो, लेकिन यूक्रेन से जारी युद्ध के बीच रूस में पिछले 24 घंटे में जो कुछ भी हुआ, वो राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. सवाल यह भी उठ रहा कि क्या रूस की सत्ता से पुतिन की पकड़ कमजोर होती जा रही है.
दरअसल, वैगनर एक प्राइवेट आर्मी है. वैगनर आर्मी रूसी सेना के साथ मिलकर यूक्रेन में युद्ध लड़ रही है. यह पिछले कई सालों से सैन्य और खुफिया ऑपरेशन्स को लेकर विवादों में भी रहा है. वैगनर आर्मी पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगते रहे हैं.
वैगनर ने कब और क्यों की बगावत?
दरअसल, वैगनर आर्मी चीफ येवगेनी प्रिगोझिन कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे खास होते थे. लेकिन अब प्रिगोझिन और रूसी सेना के बीच टकराव चल रहा है. प्रिगोझिन ने 23 जून को रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि रूसी रक्षा मंत्री ने यूक्रेन में वैगनर आर्मी पर रॉकेट से हमले का आदेश दिया. प्रिगोझिन ने कहा कि वे इस हमले का बदला रूसी रक्षा मंत्री से लेंगे और इसमें रूसी सेना हस्तक्षेप न करे. इसके बाद प्रिगोझिन ने अपने लड़ाकों के साथ यूक्रेन से लौटकर रूस की सीमा में मार्च शुरू कर दिया. 24 जून को प्रिगोझिन ने दावा किया कि उन्होंने रूस के दक्षिणी शहर रोस्तोव में कब्जा कर लिया. इसके बाद प्रिगोझिन मॉस्को की तरफ बढ़ने लगे. हालांकि, वैगनर ने पुतिन का नाम नहीं लिया.
- इससे पहले रूस ने जब यूक्रेन के डोनेट्स्क पर कब्जा किया था, तो प्रिगोझिन ने इसका पूरा श्रेय वैगनर आर्मी को दिया और रूसी रक्षा मंत्रालय पर वैगनर की भूमिका दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. - इतना ही नहीं रूसी रक्षा मंत्रालय ने 11 जून को आदेश दिया था कि वैगनर ग्रुप समेत अन्य सभी प्राइवेट सेनाओं के सैनिकों को रूसी सेना में शामिल किया जाएगा. इसके लिए सभी को जून के आखिर तक समझौता करना ही होगा. रक्षा मंत्रालय के इस आदेश को यूक्रेन युद्ध पर पूर्ण नियंत्रण पाने की कोशिश की तरह देखा गया. ऐसे में प्रिगोझिन ने विरोध में कहा, हम ऐसा कोई समझौता नहीं करेंगे. हम इसका बहिष्कार करेंगे.

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