
फ्रांस के किस कदम को लेकर मुस्लिम समुदाय सोशल मीडिया पर जता रहा है नाराजगी? जानिए
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहले ही कह चुके हैं कि हिजाब फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष आदर्शों से मेल नहीं खाता. उन्होंने ये भी कहा था कि हिजाब पहन कर सड़कों पर चलने पर रोक लगाने वाला कानून बनाया जाएगा.
फ्रांस में सीनेट की ओर से एक नए प्रस्ताव के समर्थन में वोट किए जाने से सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय की ओर से नाराजगी जताई जा रही है. इस प्रस्ताव में सार्वजनिक जगहों पर 18 वर्ष से नीचे की लड़कियों के हिजाब (सिर को ढकने वाला कपड़ा) पहनने पर रोक लगाने का प्रावधान है. ये प्रस्ताव ‘सेपरेटिज्म’ बिल का हिस्सा है. ये अभी प्रभावी नहीं हुआ है. इसके अमल में आने के लिए पहले नेशनल असेम्बली से मंजूरी लेनी होगी. At the most basic level, France’s ban on hijabs and niqabs on Muslim girls under 18 and mothers attending school trips w/kids is Islamophobic, patriarchal, &misogynistic. No matter how you slice it, this is about controlling girls & women’s bodies. This is anti-bodily autonomy. currently in france there has been a ban put for Muslim women under the age of 18 to not wear a Hijab in public. although this bill isn’t new they are arguing it would “help” young muslim women and stop them from feeling pressured to wear something that is THEIR choice to make.- pic.twitter.com/9RjrARui0I एक महीना पहले स्विट्जरलैंड के वोटरों ने बुरका और नकाब पर रोक लगाने के लिए वोट किया था. फ्रांस की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले हफ्ते फ्रैंच सीनेट ने इस प्रस्ताव के समर्थन मे वोट किया. इसमें, सार्वजनिक जगह पर किसी स्पष्ट धार्मिक प्रतीक को नाबालिगों की ओर से पहने जाने या ऐसी कोई भी ड्रेस या कपड़ा जो महिलाओं के आंतरिकीकरण की पहचान कराता हो, पर रोक लगाने की बात कही गई है.
कोलंबिया में एक विमान क्रैश हो गया, हादसे में मरने वालों की संख्या 66 हो गई है. कोलंबिया वायुसेना का विमान हरक्यूलिस सी-130 विमान रनवे से उड़ान भरते समय क्रैश कर गया. कोलंबियाई वायु सेना के विमान हादसे के बाद तुरंत बचावकर्मी मौके पर पहुंचे और अभियान शुरू किया. जानकारी के मुताबिक विमान में 125 लोग सवार थे.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.








