
पेगासस जासूसी: कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने यूएई के साथ क़रीब 4,125 करोड़ रुपये के समझौते को रद्द किया
The Wire
यूएई पर आरोप है कि उसने पेगासस स्पायवेयर के ज़रिये ब्रिटेन के कई नंबरों को निगरानी के लिए निशाना बनाया था. यूएई के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख़ मोहम्मद बिन राशिद अल-मकतूम को एनएसओ समूह का क्लाइंट माना जाता है. शेख़ की बेटी राजकुमारी लतीफ़ा और उनकी पूर्व पत्नी राजकुमारी हया, जो 2019 में देश छोड़कर ब्रिटेन आ गए थे, दोनों के नंबर पेगासस निगरानी सूची में दिखाई देते हैं.
नई दिल्ली: ब्रिटेन के प्रतिष्ठित कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा खतरनाक पेगासस स्पायवेयर के इस्तेमाल के आरोपों के चलते 400 मिलियन पाउंड (करीब 4,125 करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड डील को रद्द कर दिया है.
द गार्डियन ने रिपोर्ट कर ये जानकारी दी है. इसके मुताबिक यदि ये डील संभव हो जाती, तो यह विश्वविद्यालय के इतिहास में सबसे बड़ा अनुदान साबित होता.
इसी साल जुलाई महीने में कैंब्रिज ने ‘संभावित रणनीतिक साझेदारी’ के तहत एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका मकसद ‘पृथ्वी की कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान करने’ में मदद करना था.
हालांकि विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति स्टीफन टूपे ने कहा है कि पेगासस खुलासे के बाद यूएई के साथ सभी बातचीत बंद कर दी गई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर ईरान के साथ युद्ध को लेकर अलग-अलग रुख पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ब्रिटेन सबसे मजबूत रिश्तों में से एक था. यह देखकर दुख होता है कि यह रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा.

अमेरिका और इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की भारत के विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा की है. विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि लंबे समय से ‘मित्र’ रहे ईरान पर थोपे गए युद्ध को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ ‘विश्वासघात’ है.





