
पाकिस्तान: लाहौर हाईकोर्ट ने औपनिवेशिक युग के राजद्रोह क़ानून को रद्द किया
The Wire
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में राजद्रोह से संबंधित विवादास्पद क़ानून पर भारतीय कार्यकर्ताओं और यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार आपत्ति व्यक्त की है, यह देखते हुए कि असंतुष्टों के ख़िलाफ़ सरकार द्वारा इसका ग़लत तरीके से उपयोग किया जा सकता है.
दिल्ली: लाहौर हाईकोर्ट ने पाकिस्तान के राजद्रोह कानून को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि यह देश के संविधान के साथ खिलाफ है. इस प्रकार पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 124ए को अमान्य कर दिया गया है.
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में ठीक यही धारा राजद्रोह से संबंधित है. इस विवादास्पद कानून पर भारतीय कार्यकर्ताओं और यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार आपत्ति व्यक्त की है, यह देखते हुए कि असंतुष्टों के खिलाफ सरकार द्वारा इसका गलत तरीके से उपयोग किया जा सकता है.
भारत में शीर्ष अदालत ने 11 मई 2022 को एक अभूतपूर्व आदेश के तहत देश भर में राजद्रोह के मामलों में सभी कार्यवाहियों पर तब तक के लिए रोक लगा दी थी, जब तक कोई ‘उचित’ सरकारी मंच इसका पुन: परीक्षण नहीं कर लेता.
भारत की तरह पाकिस्तान में इस कानून की उत्पत्ति औपनिवेशिक युग में हुई और इस प्रकार इसके माध्यम से कई बार सरकार के खिलाफ उपजे असंतोष को दंडित किया जाता है.

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