
पाकिस्तान जाने की डेडलाइन खत्म, वापस क्यों नहीं गई सीमा हैदर? जानिए कारण
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29 अप्रैल की डेडलाइन खत्म हो चुकी है. भारत में रह रहे पाकिस्तानी वापस जा चुके हैं. पहले चार दिनों में ही इसी अटारी बॉर्डर से 537 पाकिस्तानी वापस पाकिस्तान जा चुके हैं. इनमें नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तानी दूतावात की 9 डिप्लोमैट्स और अधिकारी भी शामिल हैं. बहुत से पाकिस्तानी अटारी बॉर्डर के अलावा एयरपोर्ट के रास्ते भी भारत छोड़ चुके हैं.
29 अप्रैल की डेडलाइन खत्म हो चुकी है. भारत में रह रहे ज्यादातर पाकिस्तानी वापस जा चुके हैं. पहले चार दिनों में ही इसी अटारी बॉर्डर से 537 पाकिस्तानी वापस पाकिस्तान जा चुके हैं. इनमें नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तानी दूतावात की 9 डिप्लोमैट्स और अधिकारी भी शामिल हैं. बहुत से पाकिस्तानी अटारी बॉर्डर के अलावा एयरपोर्ट के रास्ते भी भारत छोड़ चुके हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच कोई सीधी फ्लाइट नहीं है. लिहाजा पाक नागरिक यहां से अन्य देश होते हुए पाकिस्तान जा रहे हैं.
देश के अलग-अलग राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी कुल 118 पाकिस्तानी वैध वीजा पर भारत आए थे. इन सबकी शिनाख्त कर इन सभी पाकिस्तानियों को भी पाकिस्तान भेजा जा चुका है. लेकिन इन 118 पाकिस्तानियों में एक पाकिस्तानी का नाम नहीं था. वो सीमा हैदर हैं. भारत में इनकी एंट्री ही इनती धमाकेदार थी कि कई दिनों तक ये अखबारों और न्यूज चैनलों के पर्दे पर छाई हुई थी. जब ये भारत में दाखिल हुई थी तब इनका नाम सीमा हैदर था, अब सीमा मीणा के नाम से पहचानी जाती हैं.
अब सवाल ये है कि पाकिस्तान से यूपी आए जब 118 पाकिस्तानियों चुन-चुन कर पाकिस्तान भेज दिया गया तो सीमा यूपी में कैसे रह गई. जवाब बेहद दिलचस्प है. 23 अप्रैल को भारत के विदेश सचिव ने एक प्रेस कॉंफ्रेंस की थी. उसमें उन्होंने पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार की तरफ से लिए गए 5 फैसलों की जानकारी दी थी. इनमें से एक जानकारी ये थी कि भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों के सभी 14 कैटेगरी के वीजा रद्द किए जा रहे हैं. इन कैटेगरी के वीजा धारकों को भारत छोड़ना होगा.
विदेश सचिव का साफ कहना था कि 14 कैटेगरी के वीजाधारकों को जो पाकिस्तान से भारत आए हैं उन्हें भारत से जाना होगा. पाकिस्तान लौटने की मियाद खत्म हो गई, लेकिन सीमा मीणा अब भी ग्रेटर नोएडा के अपने इसी घर में मौजूद है. जानते हैं क्यों क्योंकि सीमा मीणा पर रद्द किए गए 14 कैटेगरी के वीजा का आदेश लागू ही नहीं होता. इसलिए लागू नहीं होता क्योंकि सीमा बगैर वीजा के ही भारत में दाखिल हुई थी. यानि उन्होंने अवैध रूप से सरहद पार की थी. है ना कमाल की बात.
जो पाकिस्तानी वैध वीजा के साथ भारत आए उन सब पर तो गाज गिर गई लेकिन बिना भारतीय वीजा वाली सीमा बच गई. कहते हैं कई बार कुछ बुरे काम भी अच्छा कर जाते हैं. अवैध रूप से भारत में दाखिल होने की वजह से सीमा का केस यूपी की अदालत में है. अब जब तक अदालत फैसला नहीं दे देती सीमा यहीं रहेगी. सीमा का एक मामला राष्ट्रपति भवन में भी है. उसको भारतीय नागरिकता दिए जाने की मांग को लेकर. राष्ट्रपति भवन ने अब तक उस पर कोई फैसला नहीं लिया है.
भारतीय नागरिकता दिए जाने की सीमा की ये अर्जी पहलगाम हमले से बहुत पहले की है. जबतक राष्ट्रपति भवन से ये फैसला नहीं आ जाता, सीमा को तब तक भारत से पाकिस्तान नहीं भेजा जा सकता. इस बीच पहलगाम हमले के बाद जब भारत से पाकिस्तानियों को निकाले जाने की खबर आई तो सीमा ने एक वीडियो जारी कर यूपी के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री से अपील की कि उसे पाकिस्तान ना भेजा जाए क्योंकि अब वो भारत की बहू है. सीमा मई 2023 में नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल हुई थी.

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