
IAS की फैक्ट्री बन रहे इंजीनियरिंग के क्लासरूम... क्या हम हमारे टेक टैलेंट को गंवा रहे हैं?
AajTak
सिविल सेवा परीक्षा में जो उम्मीदवार चुने जा रहे हैं, उसमें आधे से ज्यादा उम्मीदवार इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या इससे इंजीनियरिंग छात्रों पर लग रहे रिसोर्स का सही इस्तेमाल हो पा रहा है?
क्या अब इंजीनियरिंग क्लासरूम यूपीएससी कोचिंग सेंटर बनते जा रहे हैं? या फिर अब आईएएस या आईपीएस जैसे पदों तक पहुंचने का रास्ता इंजीनियरिंग से होकर ही गुजरने लगा है? पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड्स से तो ये ही लग रहा है. कुछ सालों से ऐसा ट्रेंड बन गया है कि बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स पहले इंजीनियरिंग करते हैं और फिर सिविल की परीक्षा देकर प्रशासनिक सेवाओं में चले जाते हैं. लेकिन, अब सवाल यह नहीं है कि इंजीनियर अफसर क्यों बन रहे हैं, बल्कि यह है कि क्या यह ट्रेंड भारत की तकनीकी शिक्षा और सार्वजनिक संसाधनों के लिए एक गंभीर चेतावनी है.
सवाल ये भी है कि क्या ये एक सार्वजनिक सीट की बर्बादी नहीं है? या ये उस उम्मीदवार के साथ नाइंसाफी नहीं है, जो कड़ी मेहनत से सिर्फ इंजीनियरिंग करने के उद्देश्य से आईआईटी, एनआईटी में एडमिशन के लिए तैयारी करता है और कुछ नंबरों से एडमिशन नहीं ले पाता. दूसरा नुकसान यह कि सिविल सर्विस की एक सीट उस उम्मीदवार को नहीं मिली, जिसका शैक्षणिक आधार इतिहास, राजनीति, समाजशास्त्र या प्रशासन जैसे विषयों में हो सकता था. ये ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि उसके आगे एडमिशन पाने वाले उम्मीदवार पूरी पढ़ाई करने के बाद अपनी तकनीकी पढ़ाई का इस्तेमाल उस फील्ड में नहीं कर रहे हैं. उन पर जो रिसोर्स खर्च किए गए हैं, उनका इस्तेमाल भी वैसे नहीं हो रहा है, जैसे होना था.
अगर डेटा पर नजर डालें तो सिविल सेवा परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों में हर साल 55 से 65 प्रतिशत तक उम्मीदवार इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से होते हैं. 2013 से लेकर हाल के सालों तक टॉपर्स की सूची देखें तो मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरों की संख्या सबसे अधिक रही है. कई सालों में तो टॉप-10 में 7–8 उम्मीदवार इंजीनियरिंग से रहे हैं. यह बताता है कि सिविल सर्विसेज अब एक तरह से इंजीनियर-डॉमिनेटेड सर्विस बनती जा रही है.
हाल ही में आईआईटी दिल्ली की एलुमनी इम्पैक्ट रिपोर्ट 2026 आई है, जिससे पता चला है कि सिर्फ आईआईटी दिल्ली से ही 270 आईएएस, 100 से अधिक आईपीएस, आईआरएस और आईएफएस अधिकारी बन चुके हैं. ऐसे ही देश में कई आईआईटी हैं, जैसे आईआईटी कानपुर को यूपीएससी फैक्ट्री भी कहा जाता है और वहां के 600 स्टूडेंट अधिकारी बन चुके हैं. अगर सभी आईआईटी और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों का आंकड़ा जोड़ा जाए तो बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के अधिकारी मिल जाएंगे.
कितने इंजीनियर, अधिकारी बन रहे हैं?
साल 2017 से 2021 के बीच चयनित उम्मीदवारों में लगभग 60 से 65 प्रतिशत उम्मीदवार इंजीनियरिंग डिग्रीधारी रहे. यानी पांच साल में चुने गए करीब 4,300 उम्मीदवारों में से लगभग 2,700 से ज्यादा इंजीनियर थे. 2017 में 699, 2018 में 509, 2019 में 582, 2020 में 541, 2021 में 452 अधिकारी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के थे. इसके अलावा बड़ी संख्या में मेडिकल साइंस के भी काफी उम्मीदवार शामिल हैं. इसके बाद के सालों में भी ये ट्रेंड बरकरार रहा और टॉपर्स से लेकर अन्य उम्मीदवारों में काफी संख्या इंजीनियर्स की रही.

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका ने USS Abraham Lincoln कैरियर ग्रुप अरब सागर में तैनात कर ईरान पर हमले की धमकी दी है. ईरान डर से अपने न्यूक्लियर साइट्सको गहराई में छिपा रहा है. टनल सील कर रहा है. ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी को बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है. IRGC 1-2 फरवरी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज करेगा.

दिल्ली पुलिस की महिला कमांडो काजल की हत्या के मामले अब नई परतें खुल रही हैं. उसके परिजनों ने पति अंकुर पर हत्या के साथ-साथ पेपर लीक रैकेट का मास्टरमाइंड होने के गंभीर आरोप लगाए हैं. दावा है कि काजल के पास उसके काले कारनामों के राज़ थे. हत्या से पहले वीडियो कॉल और डंबल से हत्या के आरोपों ने मामले को और सनसनीखेज बना दिया है.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में चल रही नकली ब्रांडेड जूतों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का खुलासा किया है. यहां नाइकी, एडिडास, न्यू बैलेंस और स्केचर्स के नकली जूते बनाए जा रहे थे. पुलिस ने यूनिट के मालिक संदीप सिंह को गिरफ्तार कर भारी मशीनें और हजारों नकली जूतों के पार्ट्स बरामद किए हैं.

राजस्थान में साध्वी प्रेम बासा की संदिग्ध मौत. साध्वी प्रेम बासा, जो एक प्रसिद्ध कथा वाचक थीं, का अस्पताल में अचानक निधन हुआ. उनके निधन पर कई सवाल उठे हैं. पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. परिवार और आश्रम वालों के बीच विवाद भी देखने को मिला है. एक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने मामले को और पेचीदा बना दिया है.

हरियाणा के दादरी जिले में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें बीजेपी विधायक को चमचों से दूर रहने की कड़वी नसीहत एक बुजुर्ग ने दी है. यह घटना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. वीडियो में बुजुर्ग की बातों का अंदाज़ साफ दिखता है जो नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाता है. यह घटना लोकतंत्र के अंतर्गत नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधे संवाद की महत्ता को दर्शाती है. ऐसे संवाद समाज में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने में मदद करते हैं.








