
जंग के बारे में ईरानी लोगों को क्या बताया जा रहा है
BBC
ईरान के सरकारी मीडिया ने युद्ध की कवरेज में दुश्मन के हताहतों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और ईरान की तारीफ़ करने के लिए डिजिटल हथकंडे भी अपनाए.
पहले ख़बरें विदेशी टीवी चैनलों पर आईं, जिन्हें ज़्यादातर ईरानी लोग नहीं देख पाते हैं. 28 फ़रवरी को प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि "ऐसे संकेत हैं कि तानाशाह अब नहीं रहा", जिससे यह संकेत मिला कि सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई अमेरिका और इसराइल के संयुक्त हमले में मारे गए हैं. लेकिन जो ईरानी लोग सरकारी टीवी देख रहे थे, उन पर इस ख़बर को लेकर पूरी तरह ख़ामोशी थी.
सरकारी अधिकारियों ने न तो ख़ामेनेई की मौत की पुष्टि की और न ही इसे नकारा. सरकारी चैनल आईआरटीवी3 पर एक न्यूज़ एंकर ने दर्शकों से कहा कि वे उस पर और सरकार के पास मौजूद "ताज़ा जानकारी" पर "भरोसा" करें.
उसने ख़ामेनेई की मौत की ख़बर को "बिना आधार वाली अफ़वाह" बताया और कहा कि "सच जल्द सामने आ जाएगा."
अगली सुबह तक इंतज़ार करना पड़ा, जब ईरान के सरकारी मीडिया ने ख़ामेनेई की मौत की ख़बर दिखाई. यह ख़बर उस समय आई जब डोनाल्ड ट्रंप पहले ही सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा कर चुके थे.
इस युद्ध की शुरुआत से ईरान का सरकारी मीडिया अपने दर्शकों को घटनाओं का एक आधिकारिक रूप दिखाता रहा है, जिसमें सच और झूठ दोनों शामिल रहे हैं. इस जंग में कथित तौर पर ईरान में 1,200 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और ये जंग लेबनान और खाड़ी के अरब देशों तक फैल गई है.
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हालांकि लाखों ईरानी लोग विदेशों से चलने वाले फ़ारसी भाषा के सैटेलाइट टीवी चैनल देखते हैं, लेकिन स्वतंत्र जानकारी तक पहुंचना फिर भी मुश्किल है. इंटरनेट बंद होना, सेंसरशिप और कई चैनलों पर रोक के कारण अशांति और युद्ध के समय ईरान के लोग अक्सर बाहरी दुनिया से कट जाते हैं.

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