
दिग्विजय ने बताया कमलनाथ को क्या दिया था सीट शेयरिंग फॉर्मूला? अखिलेश की नाराजगी के पीछे की कहानी
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतर रही है. कांग्रेस से सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर बात नहीं बनने पर सपा अपने दम पर चुनाव लड़ रही है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद मध्य प्रदेश की कमान संभाल रखी है. कांग्रेस से विवाद के बाद अखिलेश यादव और कमलनाथ एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते हुए नजर आए थे. माना जा रहा है कि चुनाव में सपा, बीजेपी के साथ कांग्रेस की भी मुश्किलें बढ़ाएगी.
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के रुख के साथ INDIA गठबंधन में शामिल दलों ने दूरियां बनाना शुरू कर दिया है. विधानसभा चुनाव में सहयोगी दल कांग्रेस पर नजरअंदाज करने के आरोप लगा रहे हैं. यही वजह है कि समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी के बाद जनता दल यूनाइटेड ने भी अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. वहीं, कांग्रेस का कहना है कि ये अलायंस सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए हुआ है. हालांकि, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान ने गठबंधन फॉर्मूले पर बात नहीं बनने के दावे पर मुहर लगा दी.
दरअसल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश में गठबंधन नहीं होने पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस को निशाने पर लिया था और कहा था, पहले सीटें दिए जाने का आश्वास दिया गया. उम्मीदवारों की सूची भी मंगवाई गई. बाद में सपा को सीटें नहीं दी गईं. अखिलेश का कहना था कि यदि मुझे यह पहले पता होता कि गठबंधन विधानसभा स्तर पर नहीं है तो कांग्रेस से कभी बात ही नहीं करते. अखिलेश ने कांग्रेस को चेतावनी भी दी थी और कहा था, यूपी में कांग्रेस के साथ वैसा ही व्यवहार किया जाएगा, जैसे हमारे साथ कांग्रेस मध्य प्रदेश में कर रही है.
'इस बार 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी सपा?'
अखिलेश ने बयान के बाद ताबड़तोड़ अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कीं. उन्होंने अब तक 42 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. जल्द ही एक और सूची जारी किए जाने की तैयारी है. सपा ने करीब 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बनाया है. इससे पहले 2018 के चुनाव में भी सपा ने 52 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे. इनमें 45 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. सिर्फ एक उम्मीदवार चुनाव जीत कर विधानसभा में पहुंचा था. 2020 में सत्ता के उलटफेर के कुछ समय बाद वो सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.
'प्रदर्शन के आधार पर चल रही थी सीट शेयरिंग की बात'
सपा से जुड़े लोगों का कहना है कि 2018 में हमने जबरदस्त लड़ाई लड़ी थी. हमने बिजावर (छतरपुर) में जीत हासिल की थी. पृथ्वीपुर, निवाड़ी समेत पांच सीटों पर दूसरे और चार सीटों पर तीसरे नंबर पर आए थे. उसी आधार पर हम सीटें दिए जाने की बात कर रहे थे. हालांकि, कांग्रेस से बात नहीं बनी तो हम अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में आ गए हैं. उन्होंने यह भी कहा, जिन पांच सीटों पर सपा दूसरे नंबर पर आई, उनमें चार पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. यानी वहां कांग्रेस को सपा से बड़ा नुकसान पहुंचा था.

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