
दलित ईसाइयों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फ़ैसला, क्या कहा?
BBC
सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन को लेकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के दर्जे के मामले में एक अहम फ़ैसला सुनाया है.
सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन को लेकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के दर्जे के मामले में मंगलवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया.
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने कहा कि अगर कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति अपना धर्म बदलकर ईसाई धर्म को अपनाता है, तो वह व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के इसी मामले में दिए गए एक फ़ैसले को सही ठहराया.
दरअसल, आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था, "अगर कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है, उसे मानता और उसका पालन करता है, तो उसे अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता."
समझते हैं मामला क्या था और इसका क्या मतलब है?
चिंथड़ा आनंद नाम के एक पादरी ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों ने दिसंबर 2020 में उन्हें जाति-आधारित गालियाँ दी थीं. अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था कि जब वे संडे को अपने घर पर प्रार्थना कर रहे थे, तो कुछ लोगों ने उनसे मारपीट की थी.













