
छत्तीसगढ़: धर्मांतरण पर पारित हुए नए 'धर्म स्वतंत्रता क़ानून' पर उठ रहे हैं ये सवाल
BBC
सरकार ने कहा है कि नया क़ानून जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए है. लेकिन इस कानून के विरोधी कह रहे हैं कि ये व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धर्म चुनने के अधिकार को प्रभावित कर सकता है.
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को 'धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026' को ध्वनि मत से पारित कर दिया है.
राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य "बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है".
सरकार के मुताबिक़,नए कानून के लागू होने के बाद अवैध तरीकों से धर्मांतरण कराने वालों के लिए सख़्त सज़ा का प्रावधान किया गया है, जिसमें कुछ मामलों में आजीवन कारावास भी शामिल है.
छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता विधेयक को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि यह विधेयक "सिर्फ़ जबरन धर्मांतरण रोकने से कहीं आगे जाकर असर करेगा" और इससे "व्यक्तिगत आस्था पर डर और निगरानी का माहौल बनेगा".
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का क़ानून पहले से मौजूद है, इसलिए "नए प्रावधानों की जरूरत और इसके प्रभाव पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए थी."
पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों से चर्चों पर हमलों, ईसाई धर्म मानने वाले आदिवासियों के साथ हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और अंतिम संस्कार से जुड़े विवादों की खबरें सामने आती रही हैं.
इसी दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों की सक्रियता भी बढ़ी है, जो आदिवासियों की धार्मिक पहचान को लेकर अपना ख़ास दृष्टिकोण रखते हैं.













