
पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच ऐसा क्या हुआ कि पुराने विवाद ताज़ा हो गए
BBC
दोनों पड़ोसी राज्य अक्सर एक-दूसरे को 'बड़ा भाई' और 'छोटा भाई' कहते आए हैं, लेकिन हाल के दिनों में दोनों राज्यों के बीच एक बार फिर तनातनी का माहौल बनता दिखाई दे रहा है.
हिमाचल प्रदेश और पंजाब के रिश्तों में हमेशा एक अपनापन रहा है. दोनों पड़ोसी राज्य अक्सर एक-दूसरे को 'बड़ा भाई' और 'छोटा भाई' कहते आए हैं.
साझा इतिहास, सांस्कृतिक निकटता, व्यापार, रोज़गार और पर्यटन ने इन संबंधों को लंबे समय तक सहज बनाए रखा. लेकिन हाल के दिनों में दोनों राज्यों के बीच एक बार फिर तनातनी का माहौल बनता दिखाई दे रहा है.
सतह पर विवाद टोल शुल्क को लेकर है, लेकिन इसके पीछे कई पुराने और अनसुलझे मुद्दे भी हैं, जो समय-समय पर सामने आते रहते हैं और रिश्तों में खिंचाव पैदा करते हैं.
इस बार विवाद की शुरुआत हिमाचल प्रदेश सरकार के उस फ़ैसले से हुई है जिसमें एक अप्रैल 2026 से राज्य में प्रवेश करने वाले अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर लगने वाली एंट्री फ़ीस में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है.
फ़रवरी के मध्य में राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश टोल्स एक्ट, 1975 के तहत 2026–27 की संशोधित टोल नीति अधिसूचित की. इसके अनुसार अन्य राज्यों में पंजीकृत निजी कारों, जीपों और हल्के मोटर वाहनों के लिए प्रवेश शुल्क को 70 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है.
मिनी बसों और हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए यह शुल्क 320 रुपये तक, तीन एक्सल वाले ट्रकों के लिए 600 रुपये तक, भारी निर्माण वाहनों के लिए 800 रुपये और सात या उससे अधिक एक्सल वाले वाहनों के लिए 900 रुपये तक कर दिया गया है.
हिमाचल में पंजीकृत वाहनों को इस शुल्क से पूरी तरह छूट रहेगी.













