
तालिबान ने अमेरिकी सेना के लिए काम करने वाले युवक का सिर किया कलम, फैली दहशत
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32 साल के सुहैल पारदीस उन हजारों अफगान दुभाषियों में से एक थे जिन्होंने अमेरिकी सेना के लिए काम किया और अब तालिबान के खतरे का सामना कर रहे हैं. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के ऐलान के बाद अनुवादकों की शामत आ गई है.
सोहेल पारदीस ईद के मौके पर अपनी बहन को लेने के लिए अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अपने घर से पास के खोस्त प्रांत में जा रहे थे. सोहेल पारदीस ईद का जश्न पूरे परिवार के साथ मनाने के लिए बहन को लेने जा रहे थे. लेकिन 12 मई 2021 को पांच घंटे लंबी यात्रा के दौरान जब पारदीस रेगिस्तान के एक हिस्से से गुजर रहे थे, तालिबान आतंकवादियों ने उनकी कार को चौकी पर रोक दिया. (फोटो-Getty images) कुछ ही दिन पहले, पारदीस ने अपने दोस्त को बताया था कि उन्होंने 16 महीने अमेरिकी सेना के लिए अनुवादक के तौर पर काम किया था, और इसी वजह से उन्हें तालिबान से जान से मारने की धमकी मिल रही है. पारदीस के दोस्त और सहकर्मी अब्दुल हक अयूबी ने सीएनएन को बताया, "तालिबान उनसे कहते थे कि तुम अमेरिकियों के जासूस हो, तुम अमेरिकियों की आंख हो, तुम काफिर हो, हम तुम्हें और तुम्हारे परिवार को मार डालेंगे." (फोटो-Getty images)
ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








