
जिन्होंने हम पर राज किया, अब हम उन पर भारी... कमाई-पढ़ाई ही नहीं, ब्रिटेन में गोरों से कई मायनों में आगे हैं भारतवंशी
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भारतीय मूल के 42 वर्षीय ऋषि सुनक ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं. ऐसे में विदेशी धरती पर भारतवंशियों की धाक पर चर्चा फिर से शुरू हो गई है. ब्रिटेन में भारतवंशियों की आबादी 14 लाख से ज्यादा है. वहां की अर्थव्यवस्था में भारतवंशियों का 6 फीसदी का योगदान है. डेढ़ लाख से ज्यादा रोजगार भारतवंशियों की कंपनियां देती हैं. ब्रिटेन में भारतवंशी कई मायनों में अंग्रेजों से आगे हैं.
20वीं सदी दुनियाभर के लिए काफी उथल-पुथल भरी रही थी. पहला विश्व युद्ध हुआ. फिर स्पैनिश फ्लू जैसी खतरनाक बीमारी आई. अमेरिका-यूरोप से लेकर एशिया-अफ्रीका तक सबकुछ तेजी से बदल रहा था. भारत में आजादी की लड़ाई चल रही थी. फिर दूसरा विश्व युद्ध हुआ. उसके बाद भारत आजाद हुआ. आजादी के बाद बंटवारे ने फिर से अस्थिरता का माहौल बना दिया.
इसके बाद 1950 और 1960 का दशक ऐसा भी आया, जब तेजी से पलायन हुआ. सैकड़ों-हजारों की संख्या में भारतीयों ने पलायन किया. ये वो भारतीय थे, जो काम की तलाश में अपना देश छोड़कर जा रहे थे. इनमें से कई सारे भारतीय ऐसे भी थे जो ब्रिटेन की कपड़ा मिलों में काम करने गए थे. भारतीय मूल के कुछ लोग अफ्रीका से आकर ब्रिटेन में बस गए थे.
इसे प्रीति पटेल और ऋषि सुनक जैसे दिग्गजों के उदाहरण से समझ सकते हैं. प्रीति पटेल ब्रिटेन की गृह मंत्री हैं. उनके दादा गुजरात के रहने वाले थे. वो पहले युगांडा गए और फिर 60 के दशक में यूके के हर्टफोर्डशायर शहर में आकर बस गए. यहां अपना काम शुरू किया. प्रीति पटेल के पिता एक कदम और आगे बढ़े और राजनीति में आ गए. बाद में प्रीति उनसे भी आगे बढ़ीं और गृह मंत्री बन गईं.
ऐसी ही कहानी ऋषि सुनक की भी है. उनके दादा पंजाब के रहने वाले थे. वो पहले पूर्वी अफ्रीका गए और 60 के दौर में ब्रिटेन आ गए. ऋषि सुनक के पिता डॉक्टर थे और उनकी मां फार्मेसी की दुकान चलाती थीं. ऋषि सुनक ने एमबीए की पढ़ाई की और फिर नौकरी करने लगे. बाद में नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए. 2019 में ऋषि ब्रिटेन के वित्त मंत्री बन गए और अब वो प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं. इसके बाद विदेशी धरती पर भारतीय मूल के लोगों की फिर से चर्चा शुरू हो गई है.
ब्रिटेन में चाहे बात कारोबार की हो या राजनीति की, हर क्षेत्र में भारतवंशी आगे हैं. ब्रिटेन की संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स में 25 और निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में 15 भारतवंशी सांसद हैं.
यूके में 2011 में जनगणना हुई थी. उसके मुताबिक, यहां 14.13 लाख भारतवंशी हैं, जो वहां की कुल आबादी का 2.5% है. हालांकि, अब यहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी 17 लाख के करीब होने का अनुमान है. ये ब्रिटेन में सबसे बड़ा जातीय समुदाय है. इसके अलावा ब्रिटेन में साढ़े तीन लाख से ज्यादा NRI भी रहते हैं. NRI वो होते हैं जो विदेश में एक साल में 183 दिन या उससे ज्यादा समय तक रहते हैं.

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