
जिन्ना, कांग्रेस और माउंटबेटन का जिक्र... NCERT की किताब में बंटवारे के कारण को लेकर मचा सियासी घमासान, जानें कांग्रेस-सपा और बीजेपी ने क्या कहा
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एनसीईआरटी के एक मॉड्यूल में देश के बंटवारे को लेकर नए दावे किए गए हैं. इस मॉड्यूल के अनुसार, देश के विभाजन के लिए तीन तत्व जिम्मेदार थे. इसमें कहा गया है कि विभाजन का ख्वाब जिन्ना ने देखा था, कांग्रेस ने इसे स्वीकार किया और माउंटबेटन ने बंटवारा किया. इस मॉड्यूल में कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट जिक्र है, जिससे अब सियासत तेज हो गई है.
एनसीईआरटी की किताब के एक चैप्टर को लेकर अब राजनीति गर्म हो गई है। इस चैप्टर में देश के बंटवारे के तीन मुख्य कारण बताए गए हैं. पहला जिन्ना ने देश के बंटवारे का सपना देखा. दूसरा कांग्रेस ने इसे स्वीकार किया और तीसरा माउंटबेटन ने बंटवारा कराया. किताब में कांग्रेस का स्पष्ट जिक्र है और तीन मुख्य कारण बताने के कारण सियासत तेज हो गई है.
कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'आग लगा दीजिए इस किताब को. असली हकीकत यह है कि हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग की मिलीभगत से ही देश का विभाजन हुआ. इतिहास में सबसे बड़े दोषी वे लोग माने जाते हैं जिनका योगदान बंटवारे में रहा. इतिहास का सबसे बड़ा दुश्मन RSS है. उनके योगदान को कई पीढ़ियां भी माफ नहीं करेंगी.'
बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, 'जिन्ना और राहुल इनकी सोच एक जैसी है. धर्म के आधार पर भारत को बांटना.धर्म के आधार पर अखंड भारत को बांटा गया और उसके बाद जो जिन्ना की तुष्टिकरण वाली सोच आज राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी में दिखाई देती है.
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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, एनसीईआरटी में 'मुस्लिम अगेंस्ट पार्टीशन' किताब शामिल होना चाहिए ताकि सही इतिहास पढ़ाया जा सके और बार-बार फैलाए जाने वाले झूठ को सुधारा जा सके. इतिहास के अनुसार उस समय मुसलमानों की स्थिति बहुत कमजोर थी. केवल कुछ लोग ही जमीन या इनकम टैक्स देने में सक्षम थे. करीब 19 फीसदी मुसलमान भी अपनी जरूरत की चीजें जुटा नहीं सकते थे. समाज की असली ताकत जमींदार और रजवाड़े ही थे.
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा, 'बीजेपी की कोई विचारधारा नहीं है. बीजेपी की एक विचारधारा है कुर्सी पर बने रहना. बीजेपी का जब जन्म हुआ तो उन्होंने कहा था कि वे समाजवादी रास्ता पर चलेंगे. लेकिन आज बड़े उद्योगपतियों और अमीर लोगों को अधिक फायदा पहुंचाया जा रहा है. गरीब, पिछड़ा वर्ग, दलित और आदिवासी समुदायों के साथ भेदभाव की स्थिति बनी हुई है.

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